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DNA से पुष्टि, संवासिनी का ही था बरामद भ्रूण

Sat, 12 Dec 2015 01:56 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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दूधली गांव के जंगल से एसआईटी द्वारा बरामद भ्रूण मूक-बधिर संवासिनी का ही था। पीड़ित संवासिनी और भ्रूण के डीएनए मिलान में इसकी पुष्टि हुई है।
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विधि विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट शुक्रवार शाम विवेचक को मिल गई। रिपोर्ट के बाद पुलिस की अब तक की कार्रवाई पर मुहर लग गई है, क्योंकि भ्रूण बरामद होने के बाद कई स्तर पर सवाल उठाए गए थे।

फैक्स से मिली जानकारी के आधार पर अमर उजाला ने 17 नवंबर को देहरादून नारी निकेतन में संवासिनी के शारीरिक शोषण की खबर प्रकाशित की थी। अपर जिलाधिकारी वित्त झरना कमठान की रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 25 नवंबर को एसपी सिटी अजय सिंह की अगुवाई में एसआईटी गठित की थी।
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एसआईटी ने 24 घंटे में पीड़ित संवासिनी को चिह्नित करने के साथ ही भ्रूण को दूधली गांव के जंगल से बरामद किया था। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए भ्रूण का डीएनए मिलान कराया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि डीएनए मिलान में पुष्टि हुई है कि बरामद भ्रूण पीड़ित संवासिनी का ही था।

कोर्ट में दाखिल हुई रिपोर्ट को विवेचक कविता जोशी द्वारा शुक्रवार को प्राप्त किया गया, जिसमें इस बात का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट से साफ हो गया है कि पुलिस सही दिशा पर काम कर रही है। दोनों आरोपियों हाशिम और होमगार्ड ललित बिष्ट के भ्रूण से डीएनए मिलान के लिए ब्लड सैंपल भेजे हैं। आठ से दस दिन में उसकी रिपोर्ट भी आने की उम्मीद है।
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बच्ची का था भ्रूण
डीएनए मिलान में इसकी भी पुष्टि हुई है कि बरामद भ्रूण बच्ची का था। एसएसपी ने बताया कि रिपोर्ट में भ्रूण के फीमेल होने का उल्लेख है। भ्रूण हत्या की धारा पहले ही विवेचना में बढ़ा दी गई थी।
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