सरकारी अस्पताल में एक सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर ने मरीज का उपचार आधे में छोड़कर उसे अपने निजी अस्पताल में आने को कहा। परिजनों की शिकायत पर चिकित्साधीक्षक ने मामले की जांच विभागाध्यक्ष को सौंपी है।
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, झबरेडा की रहीशा (50) को फेफड़ों में पानी भरने की शिकायत पर करीब एक सप्ताह पहले दून अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि छाती रोग विभाग के एक एसआर (सीनियर रेजीडेंट) ने बिना एचओडी को बताए मरीज को भर्ती कर लिया। यही नहीं उसने मरीज के फेफड़ों से पानी निकालने की प्रक्रिया शुरू करते हुए उपकरण भी लगा दिए।
रुपयों की लालच में करीब एक हफ्ते बाद उसने परिजनों को कहा कि मरीज के शरीर में लगाए गए उपकरण निकलवाने के लिए उसके निजी अस्पताल आना होगा। परिजनों ने असमर्थता जताई तो उसने उपचार आधे में ही छोड़ दिया। लाख मिन्नतें करने पर भी डॉक्टर नहीं माना। परिजनों ने इसकी शिकायत चिकित्साधीक्षक से की। चिकित्सक पर पहले भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं।
जांच के निर्देश
शिकायत का संज्ञान लेते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. रामेश्वर पांडे को मामले की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं।
-डॉ. केके टम्टा, चिकित्साधीक्षक