देहरादून की पाम सिटी में शालू के साथ प्यार, तकरार और कत्ल का किस्सा पूरे तीन घंटे का है। करीब पौने दो घंटे तक ड्राइंग रूम में उनमें बातचीत हुई फिर बाहर आकर तकरार हो गई।
इसी बीच हाथ चले और चीखों के साथ शालू मौत की नींद सो गई। हैरत की बात यह है कि इतने लंबे समय तक तकरार, मारपीट और चीख पुकार का न तो शालू के परिजनों को पता चला और न ही पड़ोसियों को भनक लगी। कॉलोनी का सुरक्षा गार्ड भी उधर जाने की जहमत नहीं उठाई।
पॉश इलाके पाम सिटी में प्रापर्टी डीलर केके अरोड़ा की उत्तर दिशा में तीन मंजिला कोठी के सामने पार्क है। पश्चिम दिशा में खाली प्लाट होने के साथ पूरब दिशा में ड्राइंग रूम का छोटा गेट है। इस तरफ तीन फुट की गैलरी है।
बराबर की कोठी को अरोड़ा ने कुछ समय पहले बेच दिया था। रात एक बजे शालू को आखिरी बार उसकी मौसी का लड़का आशीष देखकर गया था। पुलिस की मानें तो डेढ़ बजे के करीब रवि गैलरी की तरफ से छोटा दरवाजा खुलवाकर ड्राइंग रूम में आया। करीब पौने दो घंटे तक शालू और रवि के बीच बातचीत होती रही।
इसी दौरान उसके दोस्त प्रताप और सुनील बाहर बैठे रहे। बाद में दोनों तकरार करते हुए ड्राइंग रूम से निकल कर गैलरी में आ गए। रवि ने माता-पिता को लेकर अभद्रता की तो शालू ने उसे एक थप्पड़ मार दिया। हाथापाई के दौरान शालू नीचे गिर गई और रवि ने उसका सिर पकड़कर पटक दिया।
चीख के बीच तमंचे की बट भी शालू के सिर पर मारी गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ओम सिटी कालोनी से निकल गए। तीन घंटे चले कत्ल के इस किस्से की किसी की भनक नहीं लगी।
जबकि यह मर्डर घर के बाहरी हिस्से में हुआ, जहां से रात के सन्नाटे में चीखें दूर तक गईं होंगी। पुलिस ने आसपास के लोगों से इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश की, लेकिन हर किसी ने न में जवाब दिया।
पैदल आए और पैदल ही गए
हत्यारोपियों ने पाम सिटी आने और जाने का सफर पैदल तय किया। जीएमएस रोड स्थित होटल से रवि दो साथियों के साथ पैदल पाम सिटी पहुंचा था। वारदात को अंजाम देने के बाद पैदल ही लाल पुल तक गए, वहां से टैंपू से आईएसबीटी पहुंचे। इसके बाद बस से सहारनपुर चले गए। बातचीत में रवि ने किसी तरह का वाहन होने से इनकार किया।