देहरादून में पुलिस कस्टडी में रजनीश उर्फ लाला की अप्रत्याशित मौत के बाद पुलिस के लिए जल्दबाजी में पूरी पटकथा तैयार करना चुनौती से कम नहीं था।
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सेफ प्वाइंट्स का ध्यान रखने के लिए पुलिस अफसरों ने घंटों माथापच्ची की। एक-एक पहलू पर पूरा मंथन किया गया। कानूनी विशेषज्ञों से राय मशविरे के बाद ही फर्द की एक-एक लाइन तैयार की गई।
खुद पर गाज न गिरने की पूरी तसल्ली के बाद ही पुलिस ने कस्टडी में हुई मौत का सच गले से उतारा।
पुलिस पर उल्टा पड़ गया दांव
चेन लूट की घटना के बाद पुलिस ने गुडवर्क की चाह में जमकर भागदौड़ की। रविवार सुबह बड़े खुलासे की आस में रजनीश और निखिल को हिरासत में भी लिया गया, लेकिन दांव उल्टा पड़ गया।
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रजनीश की मौत क्या हुई, पूरा पुलिस महकमा हिल गया। पुलिस के साथ प्रशासनिक अधिकारी भी कोरोनेशन अस्पताल दौड़े चले आए। चेहरों पर आशंकाएं तैर रही थीं, लेकिन सबने जुबां सिल ली थी।
एसएसपी की मौजूदगी में तैयार हुई पटकथा
कोई अधिकारी कुछ बताने के लिए तैयार नहीं था। काफी देर तक मंथन के बाद कानूनी विशेषज्ञों की पूरी टीम के साथ एसएसपी अजय रौतेला की मौजूदगी में कार्रवाई की पूरी पटकथा तैयार हुई।
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कानूनी दांव पेंच में वर्दी न फंसे, इसका खासा ख्याल रखा गया। कील-कांटे दुरुस्त करने के बाद ही अफसर मीडिया से मुखातिब हुए। इसके बावजूद कहानी में कई ऐसे छेद रह गए हैं, जो आगे चलकर पुलिस की मुश्किल बढ़ा सकते हैं।
मौते के इर्द-गिर्द घूम रहे कई सवाल
सवाल नंबर एक एसएसपी अजय रौतेला ने दावा किया कि हवालात में दोनों बंदियों के बीच झगड़ा हुआ था।
यदि ऐसा था तो उन्हें समय रहते अलग क्यों नहीं किया गया। दूसरी ओर, पुलिस हिरासत में दूसरा आरोपी निखिल इस बात को सफेद झूठ बता रहा है।
सवाल नंबर दो कप्तान का दावा है कि दोनों आरोपी नशे में धुत थे। निखिल को आधी रात से पहले ही पकड़ लिया गया था, जबकि रजनीश को साढे तीन बजे उठाया गया था।
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वे नशे में थे तो उन्हें उसी वक्त डाक्टरी सहायता क्यों नहीं दिलाई गई। रजनीश की मौत के बाद निखिल को अस्पताल पहुंचाने के पीछे क्या खेल है।
सवाल नंबर तीन कस्टडी में मौत की सचाई स्वीकारने के बाद पुलिस खुद को पूरी तरह पारदर्शी दिखा रही है। लेकिन पुलिस कुछ छिपा नहीं रही थी तो कोरोनेशन अस्पताल की इमरजेंसी और मोर्चरी की कई घंटे तक घेराबंदी क्यों की गई।
मीडियाकर्मियों ने शव दिखाने की मांग की तो इस पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया।
यह भी अजब संयोग है। पुलिस पर दाग लगाने वाला थाना फिर डालनवाला बना है।
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तीन जुलाई 2009 को रणबीर एनकाउंटर मामला इसी थाना क्षेत्र में हुआ था। मामले में दर्ज हत्या के केस में इस थाने में तैनात रहे 18 पुलिसकर्मी अभी तिहाड़ जेल में बंद हैं। अब फिर इसी थाने में कस्टडी में मौत हो गई है।