एलबीएस अकादमी में रूबी चौधरी के प्रशिक्षु आईएएस के रूप रहने के मामले में पुलिस ने हार मान ली है।
पुलिस तो नाकाम रही, लेकिन सरकारी कागजों दर्ज हुए बयानों की बदौलत सीबीआई अथवा दूसरी जांच एजेंसी के लिए उनके जवाब ढूंढने की चुनौती रहेगी। सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि पूरे खेल का मकसद क्या था? और इसका सूत्रधार कौन है?
हाई प्रोफाइल फर्जी आईएएस प्रकरण पर देहरादून से लेकर दिल्ली तक हर किसी की निगाह है। एसआईटी को शुरूआती दौर में जिस तरह के साक्ष्य मिले थे, उससे पुलिस अधिकारी काफी उत्साहित थे। उन्हें लग रहा था कि वह जल्द ही सूत्रधार का चेहरा बेनकाब कर देंगे।
अफसर लगातार इस तरह के संकेत भी देते रहे, लेकिन अचानक विवेचना सीबीआई के सुपुर्द किए जाने की संस्तुति चौंकाने वाली है। आखिर यह फैसला लेने में 38 दिन से अधिक का समय क्यों लग गया। इतनी आसानी से पुलिस हार मानने वाली नहीं थी।
ऐसी कोई न कोई बड़ी वजह जरूर है कि जिसने पुलिस को बैक फुट पर आने के लिए विवश कर दिया। अधिकारी कुछ बताने से बच रहे हैं। कारण कुछ भी रहे हों, लेकिन पुलिस अधिकारी इस बात से आश्वस्त हैं कि जल्द ही विवेचना सीबीआई के हाथों में होगी।
सवाल ही सवाल
- रूबी चौधरी के अकादमी के फर्जी तरीके से प्रशिक्षु आईएएस के रूप में रहने के पीछे का मकसद क्या था?
- रूबी को अकादमी में किसी आला अधिकारी का संरक्षण प्राप्त था, जिस कारण उसका आवागमन बेरोक-टोक होता था?
- प्रशिक्षु आईएएस के रुप में राष्ट्रपति के साथ ग्रुप फोटो और प्रोजेक्ट रिपोर्ट क्यों बनाई गई?
- एलबीएस अकादमी लाइब्रेरी की 58 किताबें कैसे रूबी चौधरी तक पहुंच गई?
- रूबी चौधरी और गार्ड देव सिंह आखिर क्यों डिप्टी डायरेक्टर को निशाना बना रहे हैं?
- अकादमी में प्रवेश के लिए रूबी चौधरी का कार्ड किस आधार पर बन गया?
कार्मिक विभाग ले रहा अपडेट
फर्जी आईएएस प्रकरण में कार्मिक विभाग लगातार पुलिस से जांच का अपडेट ले रहा है। वह पुलिस पर लगातार जांच रिपोर्ट देने का दबाव बना रहा था।
पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने गुरुवार को खुलासा किया कि कार्मिक विभाग इस मामले को लेकर गंभीर है। गृह विभाग भी जानकारी मांग चुका है। डीजीपी ने बताया कि वह पत्र लिखकर जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति करने की बात कार्मिक विभाग के संज्ञान में ला रहे हैं, ताकि वह शासन स्तर पर बात कर सकें।
60 दिन में चार्जशीट की दरकार
रूबी चौधरी के खिलाफ दर्ज हुए धोखाधड़ी के मामले में पुलिस को 60 दिन में अदालत में चार्जशीट देनी होगी। गुरुवार तक 39 दिन पूरे हो चुके हैं। यदि इस अवधि में आरोप पत्र नहीं गया तो वह आरोपी के पक्ष में जाएगा। हालांकि डीजीपी का कहना है कि यदि 50 दिन में विवेचना सीबीआई के सुपुर्द नहीं होती है तो एसआईटी अपनी तरफ से आरोप पत्र दाखिल करेगी, क्याेंकि रूबी के खिलाफ साक्ष्यों की कमी नहीं है।