देहरादून में हुई डिप्लोमा इंजीनियर नीरज कुमार की हत्या का राज कॉल डिटेल से खुलने की उम्मीद है। मामा के लड़के संदीप ने तो साफ तौर से रात में दून आने से इनकार कर दिया था। अब सवाल उठता है कि आखिर वह कौन था? जिसे नीरज ने मामा का लड़का बताया था। कमरे से मोबाइल न मिलने के कारण पुलिस डिटेल की माथापच्ची में लगी है।
पुलिस ने इंस्टीट्यूट के मालिक ज्ञानेंद्र वर्मा के हवाले से बताया नीरज ने शनिवार दोपहर को उसकी पत्नी को एसएमएस कर अनुमति ली थी कि मुरादाबाद से उसके मामा का लड़का आ रहा है, क्या उसे आवास पर ला सकता है। पत्नी से इसकी इजाजत दे दी थी।
रात में आठ बजे के करीब मामा के लड़के के आने का मेसेज भी नीरज ने दिया था। पुलिस ने उसी आधार पर नीरज के मामा के लड़के संदीप से दून आने के बारे में बात की। संदीप ने इससे साफ इनकार कर दिया। इसके बाद सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर नीरज द्वारा बताया गया मामा का लड़का कौन था?
मोबाइल घटनास्थल से गायब होने के कारण पुलिस को कॉल डिटेल से काफी कुछ मिलने की उम्मीद है। मसलन उसके द्वारा शनिवार को किस-किस से बात की गई। नंबर के आधार पर रात में ठहरे शख्स के बारे में भी जानकारी मिल सकती है।
दीवार पर मिले फुट प्रिंट
फॉरेंसिक टीम को कोठी की दीवार से खून से सने फुट प्रिंट भी मिले हैं। हालांकि हत्यारोपी कमरे में अंदर के रास्ते से निकला है। कमरे में तो किसी तरह के निशान नहीं मिले हैं, लेकिन दीवार पर जरूर फुट प्रिंट मिला है। मुख्य दरवाजे पर ताला लगा होने के कारण हत्यारोपी के दीवार से कूदकर भागने की आशंका है।
जो भी हाथ में आया, वार करता चला गया
कातिल जो भी हो, वह नीरज से बेहद खुन्नस रखता था। उसके हाथ में जो भी आया, अंधाधुंध वार करता चला गया। तवे का हत्था टूटने के साथ चाकू तक मुड़ गए, लेकिन कातिल के हाथ नहीं रुके।
शरीर का कोई ऐसा हिस्सा नहीं है, जहां पर वार नहीं किए गए। घटनास्थल तो अप्रत्याशित कत्ल की कहानी बयां कर रहा है, लेकिन सही तस्वीर तो आरोपी के हाथ आने के बाद ही साफ हो पाएगी।
नीरज 2009 से 2011 तक देहरादून में रहा, लेकि न अब मुरादाबाद में था। नौकरी के सिलसिले में यदाकदा यहां आता रहता था। कई बरस में पाम सिटी में रहने के बाद ज्ञानेंद्र वर्मा ने चार दिन पहले ही इस मकान को किराए पर लिया था। मकान की लोकेशन इतनी उलझी हुई है कि वहां कोई आसानी से नहीं पहुंच सकता है।
जाहिर है कि जो भी शख्स आया था, उसे नीरज ही लेकर आया। मकान मालिक की मानें तो रात डेढ़ बजे तक नीरज सही था। फिर ऐसा क्या हुआ कि उसकी जिंदगी छीनने का कारण बन गया। जिस किसी ने भी नीरज का कत्ल किया है, वह उससे बेहद खुन्नस रखता था।
पंचायतनामे में गले, चेहरे, कमर, हाथ, छाती और पेट पर करीब डेढ़ दर्जन के करीब निशान चिह्नित किए गए। हत्या में घरेलू औजारों का प्रयोग किया गया। खून से लथपथ शव के पास ही सब्जी काटने वाले तीन चाकू पड़े थे, जो मुड़ गए थे।
तवे के अलावा कुकर का ढक्कन, एक चुन्नी मिली है। पूरे बिस्तर पर खून सना था। गला दबाते समय हत्यारोपी से नीरज की जद्दोजहद भी हुई है। ऐसे में लगता है कि कातिल एक या दो भी हो सकते हैं।
पुलिस भी हत्या को लेकर एक राय तय नहीं कर पाई है। क्योंकि यदि हत्यारोपी कत्ल करने के इरादे से ही आया था तो डेढ़ बजे तक अकेला होते हुए अपना मकसद क्यों पूरा नहीं किया? हत्यारोपी ने मकान मालिक के होते हुए कत्ल करने का रिस्क क्यों लिया? जिस तरह कत्ल किया गया है, उससे यही लगता है कि घटना सुनियोजित के बजाए अप्रत्याशित प्रतीत हो रही है।
परिजनों की नजर में नहीं कोई वजह
बेटे नीरज की नृशंस तरीके से हत्या की खबर पर परिजन भी शाम को यहां पहुंच गए। एफसीआई में काम करने वाले पिता भूर सिंह बेटे की हत्या को लेकर सदमे में हैं। उनका कहना है कि ऐसी कोई वजह उनके संज्ञान में नहीं रही, जिससे कत्ल हो सकता है। वह तो नौकरी के लिए दून आया था। यहां क्या हुआ, कुछ कह नहीं सकते।
व्यवहारिक था नीरज
ज्ञानेंद्र वर्मा और उनकी पत्नी स्वजांलि वर्मा का कहना था कि नीरज कई बरस से उनके परिवार का हिस्सा था। उसके परिजनों का भी आना-जाना था। व्यवहारिक होने के साथ नीरज बेहद गंभीर था। यह कैसा हुआ, वह खुद हैरान हैं।
किसने की उल्टी
खून से लथपथ कमरे के एक हिस्से में उल्टी भी की गई है। हालांकि कमरे की तलाशी में पुलिस को किसी तरह का सामान नहीं मिला है। आशंका यह थी कि हो सकता है कि शराब का सेवन किया गया हो। परिजनों का कहना है कि नीरज शराब नहीं पीता था।