ऐसे किया गया फर्जीवाड़ा
मामले में पहले बैंक ने आंतरिक जांच की थी। जिसके बाद ये मामले सामने आए। जांच में पता चला कि लोन देने के लिए किसानों की फर्जी खतौनी बनाई गईं और उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड के जरिये लोन बांटे गए। इसके बाद इस लोन को ट्रैक्टर या अन्य कृषि यंत्र खरीदने के लिए मार्जिन मनी के तौर पर इस्तेमाल किया गया और उन्हें एग्रीकल्चरल टर्म लोन बांटे गए। जबकि केसीसी केवल फसल उत्पादन के लिए जरूरी बीज व खाद आदि खरीदने के लिए किसानों को दिया जाता है। वहीं टर्म लोन में किसान खुद से मार्जिन मनी बैंक को देता है और उसकी हैसियत के अनुसार उसे टर्म लोन बांटा जाता है।
किसानों को नहीं मिले उपकरण, लगाई फर्जी रसीदें
जांच में पाया गया जिन उपकरणों को खरीदने के लिए टर्म लोन दिए गए उनकी फर्जी रसीदें और कुटेशन बैंक में जमा की गईं। भौतिक सत्यापन में पाया गया कि कई किसानों को उपकरण दिए ही नहीं गए। यह सारा पैसा बैंक मैनेजर और ट्रैक्टर डीलर ही चट कर गए। इनमें से कई किसान दूसरे बैंकों के डिफाल्टर भी हैं। बैंक ने जब भौतिक सत्यापन किया तो पाया कि कई किसान तो इस समय भूमिहीन हो चुके हैं। कई किसान ऐसे हैं जो खेती ही नहीं कर रहे। जांच में कई और चौंकाने वाली बातें भी सामने आई हैं।