उत्तराखंड, दिल्ली और यूपी पुलिस भले ही मुठभेड़ के बाद भूरा को पकड़ने की बात कह रही हो, लेकिन सूत्रों की मानें तो तीन राज्यों की पुलिस को नाको तले चने चबवाने वाला अमित उर्फ भूरा फिर इश्कमिजाजी की वजह से मात खा गया।
एक युवती को लेकर हुई मारपीट के बाद ही वह कानून की गिरफ्त में आया। पुलिस की नजर में भी भूरा की यह सबसे बड़ी कमजोरी थी। यही वजह थी कि पुलिस ने उसकी महिला मित्रों की घेराबंदी में भी कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी।
दस लाख का इनाम लेकर देश भर के अपराधियों में नंबर वन का खिताब पाने वाला अमित उर्फ भूरा इतनी आसानी से पकड़ा जाएगा, इसके उम्मीद कम ही थी, क्योंकि उसके नेटवर्क के सामने पुलिस का सर्विलांस, मुखबिर तंत्र और मोटी रकम के ऑफर भी काम नहीं आए।
पकड़ना तो दूर पुलिस उसका लोकेशन तक नहीं खंगाल चुकी। जुर्म की दुनिया के कई उस्तादों को भी उसके पीछा लगाया गया, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। कानून की घेराबंदी के बाद भी भूरा आलीशान होटलों में रहने की ललक और इश्क मिजाजी से खुद को अलग नहीं कर पाया।
पहले भी गोवा में उसकी गिरफ्तारी की वजह महिला मित्र से नजदीकियां ही बनी थी। पंजाब के पटियाला शहर में पहचान और नाम बदलकर रह रहा था। किसी को उस पर जरा सा भी शक नहीं था। यहां भी वह इश्क के फेर में फंस गया था। अपने इश्क को लेकर उसका कुछ युवकों से झगड़ा हो गया।
पहचान छिपाकर कहां रहा भूरा
भूरा और उसके साथी सचिन खोखर ने मारपीट कर दी, जिससे हंगामा हो गया। स्थिति यह हुई तो पुलिस को आना पड़ा। पहले तो भूरा और सचिन को मारपीट में लाया गया था, लेकिन सत्यापन के फेर में वह कानून की नजरों से खुद को नहीं बचा पाया।
तीन राज्यों की पुलिस दिल्ली से लेकर मुंबई और गोवा से नेपाल तक भटकती रही, जबकि पटियाला पुलिस की झोली में भूरा खुद-ब-खुद आ गया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कई शहरों में उसकी महिला मित्र रही है, लेकिन फरारी के बाद उनसे किसी तरह का संपर्क साधने की कोशिश नहीं की है।
अमित उर्फ भूरा की गिरफ्तारी के बाद हर कोई यह जानना चाहता है कि इतने दिन भूरा कहां और कैसे रहा। क्या उसने अपना हुलिया बदला था। पंजाब के पटियाला में वह किस नाम से रह रहा था। ऐसे तमाम सवालों के जवाब नहीं मिल पाए है। पुलिस अधिकारी भूरा की गिरफ्तारी के अलावा कुछ पता होने से मना कर रहे हैं।
भूरा का लंबा आपराधिक इतिहास
पुलिस की माने तो भूरा के खिलाफ 50 के करीब आपराधिक मामले दर्ज है। पहली बार वह चोरी के मामले में कानून की किताब में उसका नाम चढ़ा था। उसके बाद भूरा ने मुड़कर नहीं देखा। सुनील राठी, राहुल खट्टर जैसे अपराधियों के लिए वह काम करता रहा है।