दस लाख के इनामी अपराधी अमित मलिक उर्फ भूरा की तलाश में दो महीने तक की नाकामी के बाद जीरो से शुरू करने वाली पुलिस अभी तक शून्य पर ही अटकी है।
भूरा तो बहुत दूर की बात पुलिस उसके किसी करीबी साथी तक को नहीं पकड़ पाई है। यदि गौर से देखा जाए तो पुलिस की पूरी कवायद कागजों में ही चल रही है। कभी पूर्व विधायक रामवीर शौकीन को मुल्जिम बना दिया जाता है तो कभी उसके पूर्व पीए अरविंद पर एनएसए की तैयारी शुरू कर दी जाती है।
दस दिन हो गए, जब आईजी मेरठ जोन आलोक शर्मा ने बागपत पुलिस को दो टारगेट दिए थे। पहला भूरा और दूसरा एक लाख का इनामी प्रमोद। साथ ही यह भी कहा था कि भूरा पर काम जीरो से शुरू किया जाए। पुलिस सिर्फ भूरा ही नहीं, प्रमोद पर भी जीरो ही बनी हुई है। दोनों बदमाशों का कोई सुराग तक नहीं मिला है।
इस बीच भूरा फरारी प्रकरण में पुलिस दस दिन से केस डायरी के पन्ने रंगे जा रही है। दिल्ली की मुंडका विधान सभा क्षेत्र के पूर्व विधायक रामवीर शौकीन को भूरा को छुड़ाने की साजिश का आरोपी बनाया, लेकिन उनकी गिरफ्तारी तो दूर उनसे पूछताछ तक नहीं हो पाई है।
आईजी ने बताया था कि इस केस में टीकरी की चेयरपर्सन राजबाला भी आरोपी हैं, लेकिन पुलिस लिखा पढ़ी में अभी तक उनका नाम मुल्जिम के तौर पर सामने नहीं आया है।