देहरादून कैंट पुलिस ने बैंकों से करीब ढाई करोड़ की ठगी के मामले में दो साल से फरार चल रहे जालसाज को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी पश्चिमी दिल्ली में पहचान छिपाकर बेरोजगार युवकों से विदेश भेजने के नाम पर धन ऐंठ रहा था। आरोपी ने पुलिस को दिए बयानों में बैंकों की कमीशनखोरी का चिट्ठा भी खोल दिया है। उसने आरोप लगाया कि कमीशन के वजह से बैंकों में फर्जीवाड़ा बढ़ रहा है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि 2014 से बैंकों की ठगी के मामले में फरार चल रहे वीरेंद्र सिंह नेगी निवासी शास्त्री नगर हरिद्वार रोड की धरपकड़ के लिए इंस्पेक्टर कैंट हरीश मेहरा की अगुवाई में टीम गठित की गई थी। नेगी पर जिले के विभिन्न बैंकों से कूटरचित अभिलेखों के आधार पर करीब ढाई करोड़ रुपये का लोन हड़पने का आरोप था।
कैंट पुलिस ने आरोपी नेगी को काफी प्रयासों के बाद गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपने साथियों के नाम बताए हैं, जिनकी तलाश में दबिश चल रही है। बैंक कर्मियों के अलावा स्टांप विक्रेताओं की सांठगांठ भी सामने आई है। उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
ऐसे करता था फर्जीवाड़ा
जालसाज नेगी सहयोगियों से मिलकर एक रजिस्ट्री की कई प्रतियां कूटरचना कर बना लेता था। बैंकों से कथित संपत्ति मोर गेज कर जमीन खरीदने, मकान बनाने और बिजनेस के नाम पर मोटा लोन हड़प लेता था। आरोपी ने शास्त्री नगर में अपने पिता गुलाब सिंह, नेहरू ग्राम शताब्दी एंकलेव में मामा दिनेश सिंह चौधरी और तुनवाला, भाऊवाला स्थित संपत्तियों के कई कूटरचित रजिस्ट्री आदि बनाकर बैंकों से ऋण प्राप्त कर लिया था।
इन बैंकों से हड़पा लोन
करनपुर बैंक से 12 लाख, ऋषिकेश से 12 लाख, नया गांव बैंक से 10 लाख, एस्ले हाल बैंक से 12 लाख, 17 लाख, बैंक ऑफ बड़ौदा से 12 लाख, इंडिया बुल्स बैंक राजपुर रोड से 23 लाख, यूनियन बैंक से 23 लाख, यूको बैंक सहस्त्रधारा से सात लाख, पंजाब एंड सिंध बैंक राजपुर रोड से 20 लाख, गढ़ी कैंट से 15 लाख, सर्वे ऑफ इंडिया से 10 लाख, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, सिटी बैंक राजपुर रोड से 25 लाख, पंजाब एंड सिंध बैंक से 10 लाख, यूको बैंक घंटाघर से 10 लाख, यूनियन बैंक ऑफ कुवाल्टा, टिहरी गढ़वाल से चार लाख का लोन लेकर आरोपी फ रार चल रहा था। अधिकांश बैंकों की तरफ से उसके खिलाफ अभियोग पंजीकृत है। वीरेंद्र नेगी ने बताया कि प्राइवेट लोगो से भी कई करोड़ रुपये ब्याज पर लिए थे। इंडिया बुल्स बैंक लोन के मामले में आरोपी 18 माह की सजा भी काट चुका है।
ढाई हजार का इनाम
एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने टीम में शामिल इंस्पेक्टर हरीश मेहरा, मनोज रावत, मनोहर सिंह रावत, कांस्टेबल पंकज मलासी, अजय कुमार, रामचंद्र सिंह, केसर मुस्तफा जैदी और रमेश कुमार को ढाई हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की।
सब कुछ फर्जी ही फर्जी
आरोपी वीरेंद्र नेगी ने एक से बढ़कर एक फर्जीवाड़ा किया है। उसने अपना नाम बदलने के साथ ही क्लेमेंटटाउन क्षेत्र के एक शख्स को अपना फर्जी पिता बना रखा है। बाकायदा दून से उसकी फर्जी आईडी भी थी, जो उसने हाल में ही नष्ट की है। उसकी पत्नी बच्चों के साथ करनपुर क्षेत्र में रहती है।
जालसाज वीरेंद्र नेगी के बयानों में आई बैंक कर्मियों की सांठगांठ को लिखा पढ़ी में लिया गया है। जल्द ही उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाकर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. सदानंद दाते, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक