उत्तराखंड के लालकुआं से एक बालिका का ढोंगी बाबा ने अपहरण कर लिया। वह उसे बोरे में बंद कर ट्रेन से कहीं ले जा रहा था।
रास्ते में किसी तरह बालिका बोरे से निकलकर ट्रेन से उतर गई। कुछ युवकों ने उसे उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। शनिवार को लालकुआं रेलवे स्टेशन के समीप हाथीखाना के पास स्थानीय निवासी इकरार की दस वर्षीय पुत्र कहकशां खेल रही थी।
इतने में एक बाबा आया और उसने बालिका को नशीला पदार्थ सुंघा दिया। वह उसे एक बड़े बोरे में बंदकर लालकुआं से गूलरभोज जाने वाली गाड़ी में सवार हो गया। रास्ते में लड़की को होश आया तो उसने खुद को बोरे में बंद पाया, किसी तरह जद्दोजहद कर बालिका बोरे से बाहर निकल गई।
ट्रेन बेरिया हाल्ट पर रुकी तो बालिका उतर गई और पटरी-पटरी चलते हुए गूलरभोज पहुंच गई। देर शाम ग्राम कोपा खास ढकानी के कुछ युवक रेलवे लाइन पर बैठे थे। रेलवे ट्रैक पर रोती बच्ची को देख युवाओं ने उससे पूछताछ की। उसने बताया वह लालकुआं रहती है और एक बाबा उसको उठा लाया।
यह सुन सेंचुरी पेपर मिल लालकुआं में काम करने वाले हेमराज ने अपने एक साथी को लालकुआं फोन कर लड़की के बारे में बताया। उक्त युवक ने लड़की के पिता इकरार को घटना की जानकारी दी। उधर, दिनभर खोजबीन के बाद इकरार पुलिस को सूचना दे रहा था कि गूलरभोज से फोन आ गया। देर रात इकरार अपने साथियों के साथ गूलरभोज पहुंच गया। आते ही किशोरी अपने पिता को देखकर लिपट गई और फफककर रोने लगी।
पिता-पुत्री के मिलन पर मौजूद सभी की आंखें नम हो गईं। इकरार ने सभी का आभार जताकर युवकों की इंसानियत की तारीफ की। बच्ची को सुरक्षित उसके पिता को सुपुर्द करने वालों में वासू, नरेंद्र गौड़, जागन सिंह, रमेश कार्की, करन, विशाल ग्रोवर, अमित गुप्ता, हेमराज आदि युवा थे।
बच्ची के साथ हो सकती थी अनहोनी
रोती बिलखती बच्ची को देखकर लोगों के जहन में एक ही सवाल कौंध रहा था कि इतनी छोटी बच्ची का अपहरण किस मकसद से किया जा रहा था। ये तो बच्ची का साहस था कि वह बाबा को चकमा देने मेें कामयाब हो गई।
आरपीएफ की सक्रियता पर सवालिया निशान
समाजसेवी विशाल ग्रोवर और नरेंद्र गौड़ ने कहा कि बच्चों के अपहरण के कई केसों में अधिकतर भिखारी और बाबाओं का हाथ होता है। पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल इन लोगों की तलाशी ले तो ऐसे कई मामले पकड़ में आएंगे। रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ का थाना है और सुरक्षाबलों का हमेशा पहरा होता है। इसके बावजूद बाबा का दुस्साहस ही कहेंगे कि वह बालिका को बोरे में भरकर आराम से ट्रेन में बैठ गया।