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शिकायत नहीं मिली तो मुकदमे से पहले कैसे निलंबित हुआ शिक्षक?

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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मॉडल स्कूल फॉर विजुअली हैंडीकैप्ड (एमएसवीएच) में नेत्रहीन छात्राओं से छेड़छाड़ और शारीरिक शोषण के मामले में शिक्षक के खिलाफ मुकदमे से पहले ही उसे निलंबित कर दिया गया था। पहले उसका ट्रांसफर किया गया और फिर उसी दिन शाम को निलंबित कर दिया गया। ऐसे में प्रबंधन की यह कार्रवाई अधिकारियों के उन बयानों से मेल नहीं खाती, जिनमें उन्होंने कहा था कि उनके पास छात्रों ने ऐसी कोई शिकायत नहीं की है। अब बड़ा सवाल यह है कि जब छात्रों ने कोई शिकायत ही नहीं की तो फिर शिक्षक सुचित नारंग के खिलाफ एक्शन कैसे ले लिया गया ? सोमवार को छात्रों की मांग पर उन्हें दोनों कार्रवाई के लेटर उनके सामने रखे गए तो यह तथ्य सामने आया।
दरअसल, गत 16 अगस्त को छात्रों ने शिक्षक की करतूतों के खिलाफ आवाज उठाते हुए प्रदर्शन शुरू किया था। अगले दिन 17 अगस्त को जब संस्थान के अधिकारियों विशेषकर निदेशक अनुराधा डालमिया से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। उन्होंने छात्राओं के आरोपों को पूरी तरह से निराधार ठहराया और इसे राजनीति से प्रेरित घटना बताया। छात्र लगातार अध्यापक सुचित नारंग के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। प्रकरण में बाल आयोग के हस्तक्षेप के बाद 18 अगस्त को देर रात आरोपी शिक्षक नारंग के खिलाफ केस दर्ज कराया गया। छात्रों को तब तक किसी प्रकार की कार्रवाई के बारे में कोई लिखित आदेश नहीं दिखाए गए।
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उन्हें बताया गया कि सुचित नारंग का ट्रांसफर किया गया है। सोमवार को जब छात्रों ने प्रबंधन पर दबाव बनाया तो उन्हें दो लेटर दिखाए गए। इनमें एक लेटर सुचित नारंग के संस्थान में ही ऑडियो लाइब्रेरी में ट्रांसफर का जबकि दूसरा उसके निलंबन का है। दोनों लेटर 17 अगस्त के हैं। प्रधानाध्यापक कमलवीर सिंह जग्गी ने बताया कि छात्रों की मांग पर ही उसका ट्रांसफर रद्द कर निलंबन किया गया था। वहीं, अब निदेशक अनुराधा डालमिया कह रही हैं कि 17 अगस्त को छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए सुचित को निलंबित कर दिया गया था।
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मजिस्ट्रेटी बयानों में की पुष्टि
पुलिस ने सोमवार को चार छात्राओं के मजिस्ट्रेटी बयान कराए। एसओ राजपुर अरविंद चौधरी ने बताया कि छात्राओं ने अध्यापक पर लगाए पूर्व के आरोपों की दोहराया है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को कुछ और छात्रों के भी मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज कराए जाएंगे।
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निदेशक और सुचित की मिलीभगत का आरोप
छात्रों का आरोप है कि सुचित नारंग से जब वे इस विषय में बात करते थे तो वह बार-बार निदेशक के नाम की धमकी देता था। कहता था कि निदेशक उसकी बहन हैं, वह उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती हैं। इसके अलावा छात्रों ने निदेशक पर भी आरोप लगाए कि उन्होंने तीन दिन पहले ही छात्रों को धमकी दी है कि वे चाहे जो कर लें। उनकी शिकायत पर वे कोई एक्शन नहीं लेंगी।
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एसएसपी से दो बार शिकायत कर चुका है सुचित

खुद को किसी षड्यंत्र में फंसाने की बात कहकर की थी दो शिकायतें
एसएसपी बोलीं- दोनों शिकायतों को विवेचना में किया जाएगा शामिल

अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। छेड़छाड़ के आरोपी शिक्षक सुचित नारंग ने भी एसएसपी से दो बार शिकायत की थी कि उसे किसी मामले मेें फंसाने की साजिश की जा रही है। बताया जा रहा है कि उसने संस्थान प्रबंधन से अपने कमरे में सीसीटीवी कैमरे लगाने का भी आग्रह किया था। इस संबंध में एसएसपी निवेदिता कुकरेती का कहना है कि सुचित की शिकायतों को भी विवेचना में शामिल किया जाएगा।
दरअसल, शुरू से ही इस मामले में एक षड्यंत्र की बात कही जा रही है। निदेशक अनुराधा डालमिया का कहना है कि सुचित की ओर से 25 जुलाई को एक शिकायत एसएसपी को की गई थी। 16 अगस्त को भी एसएसपी कार्यालय को शिकायत कर सुचित कहा था कि उसके खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा है। डालमिया ने बताया कि सुचित ने मॉडल स्कूल के प्रिंसिपल से भी कहा था कि वे उसके कमरे में क्लोज सर्किट कैमरा लगवा दें, ताकि यहां आने जाने वाले की गतिविधियों को देखा जा सके।
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पुलिस इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहती है, लिहाजा इस ओर भी जांच शुरू कर दी गई है। एसएसपी निवेदिता कुकरेती का कहना है कि पुलिस सुचित नारंग की शिकायतों की भी जांच कर रही है। सुचित नारंग को संस्थान की छात्रा से छेड़छाड़ के पूर्व के एक मामले में गवाह बताया जा रहा है। एसएसपी ने बताया कि पुलिस इस बात की तफ्तीश भी कर रही है कि सुचित नारंग ने पूर्व के मुकदमे में किस तरह पुलिस और पीड़ित छात्र की मदद की थी। इन सब बातों की जांच के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा।
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