चाय पत्ती घोटाले में डीजीएम समेत तीन को पांच साल की कैद
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। भारत हैवी इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (भेल) हरिद्वार की कैंटीन में हुए चाय पत्ती घोटाले में दोषी पाए गए डीजीएम (कैंटीन) समेत तीन लोगों को पांच साल की सजा सुनाई गई है। स्पेशल जज सीबीआई सुनीता सिंह ने सभी दोषियों पर 1.46 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
भेल हरिद्वार में यह घोटाला साल 2008 को सामने आया था। सीबीआई के अधिवक्ता सतीश शर्मा ने बताया कि फरवरी से जून 2008 तक कैंटीन में सप्लाई की गई चाय पत्ती के बिल में हुए खेल की शिकायत भेल के वित्त विभाग को हुई थी। वित्त विभाग ने जांच में पाया कि कैंटीन को चाय पत्ती सप्लाई करने वाली फर्म ने 250 ग्राम के पैकेट के स्थान पर एक किलोग्र्राम के पैकेट का बिल लगाया है। इसमें उसकी कुछ अधिकारियों से मिलीभगत का अंदेशा भी जताया गया था। मामला सामने आने के बाद उन्होंने इसकी सीबीआई से शिकायत की थी।
अधिवक्ता सतीश शर्मा के अनुसार सीबीआई ने फरवरी 2009 में मुकदमा दर्ज कर इस प्रकरण की जांच की थी। जांच में सामने आया कि चाय सप्लाई करने वाली ज्वालापुर हरिद्वार की फर्म के मालिक अनुराग गुप्ता ने डीजीएम (कैंटीन) जीबी गोयल, निवासी राजौरी गार्डन, दिल्ली और स्टोर इंचार्ज बीएस राणा, निवासी पौड़ी गढ़वाल के साथ मिलकर घोटाला किया है। सीबीआई ने गेट पर तैनात सीआईएसएफ का रजिस्टर चेक किया तो पता चला कि सप्लायर ने कुल 576 पैकेट (250 ग्राम) कैंटीन को सप्लाई किए हैं। जबकि इनके स्थान पर 576 किलोग्राम चाय का बिल वित्त विभाग भेल को भेजा गया। इस तरह करीब 15 लाख रुपये का चाय पत्ती घोटाला सामने आया। मामले में सीबीआई ने जीबी गोयल, बीएस राणा और अनुराग गुप्ता के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र व धोखाधड़ी के आरोप में चार्जशीट दाखिल की थी। इनमें सरकारी अधिकारी होने के कारण जीबी गोयल और बीएस राणा के खिलाफ भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम का मामला भी बना। इस पर कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से कुल 19 गवाह और वैज्ञानिक साक्ष्य न्यायालय में पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष केवल पांच गवाह ही पेश कर सका।
बृहस्पतिवार को न्यायालय ने सभी दोषियों को पांच साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही अलग-अलग धाराओं में कुल 1.46 लाख रुपये का जुर्माने भी लगाया है। जिसमें जीबी गोयल और बीएस राणा पर 52-52 हजार रुपये का व अनुराग गुप्ता पर 42 हजार रुपये का जुर्माना है।