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‘स्वास्थ्य कुंभ’ में लगाई योग की ‘डुबकी’

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दिव्यांग शिविर:
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‘स्वास्थ्य कुंभ’ में लगाई योग की ‘डुबकी’
-आर्ट आफ लिविंग की ओर से कराया गया प्राणायाम और भस्त्रिका का अभ्यास
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। अग्रवाल धर्मशाला प्रांगण में मरीजों या दिव्यांगों के साथ पहुंचे तीमारदारों ने इस ‘स्वास्थ्य कुंभ’ को दौरान योग की डुबकी लगाई। आर्ट आफ लिविंग के योग प्रशिक्षकों ने लोगों को प्राणायाम और भस्त्रिका का अभ्यास कराया। इस दौरान लोगों ने कठिन और जोखिम भरे आसनों को हंसी ठहाकों के बीच आसानी से सीख लिया।
आर्ट आफ लिविंग की ओर से लगाए गए योग शिविर में पहुंचे लोग और महिलाएं पहले हिचकती रहीं। बाद में ऐसा रोमांचक माहौल बना कि आसपास बैठे तीमारदार, महिलाएं और बच्चे भी प्राणायाम, अनुलोम-विलोम और भस्त्रिका जैसे योगासन करने लगे। इस दौरान बच्चों को ताली बजवाकर और बैठने का तौर तरीका बताकर जीने की कला सिखाई गई। इसके अलावा योग विशेषज्ञों ने लोगों को योग के जरिये निरोग रहने की जानकारी दी।
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अपने बूते खड़ी हुई दिलशाना
देहरादून। इसे लापरवाही कहें या भाग्य का लेखा...दिलशाना को अपना दाहिना पैर सेप्टिक की वजह से गंवाना पड़ा था। इस कमी की भरपाई तो नहीं हो सकती, लेकिन बेहतर विकल्प हसरतों को उड़ान जरूर दे सकता है। विकासनगर के सहसपुर निवासी दिलशाना उन दिनों को याद कर आज भी सिहर उठती हैं जब सेप्टिक ने उनके जीवन को अपंग बना दिया था। उन्हें भी सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर खासा उलाहना है। शनिवार को मानो सारे दर्द पर मरहम लग गया जब दिलशाना को कृत्रिम पैर मिला और चंद कदम चलकर उन्होंने महसूस किया। उनसे जब पूछा गया कि अरसे बाद अपने पैरों पर खड़े होकर कैसा महसूस हो रहा है तो वह झेंप गईं। मानों उन्हें खोई हुई जीवन की निधि फिर से मिल गई हो। डरते डरते उन्होंने बैसाखी छोड़ अपने दोनों पैरों के सहारे चलने की कोशिश की। दिलशाना के चेहरे की चमक और हौसला देखने वाला था। दिलशाना ने जज्बे से भरे लहजे में कहा कि जल्द ही वह कृत्रिम पैरों के सहारे बेधड़क चलेगी।
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