जेल से संचालित हो रहा फर्जी बैनामे का धंधा
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। जेल में बंद (निरुद्ध) व्यक्ति फर्जी बैनामा गिरोह का संचालन कर रहा है। भले ही आम आदमी के लिए रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी करना आसन न हो है, लेकिन अपराधियों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर दूसरों की जमीन बेचना बायें हाथ का खेल बन चुका है। इसमें तहसीलकर्मियों से लेकर भाड़े के कारिंदों तक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी तरह का एक मामला शनिवार को उजागर हुआ है। मुख्तियार नाम के व्यक्ति ने कुंवर सिंह बनकर बेशकीमती जमीन बेच दी। शिकायत के बाद पुलिस पड़ताल में जुटी तो पता चला कि पूरा सिंडीकेट जेल से संचालित हो रहा है।
पुलिस के अनुसार सुद्धोवाला में अजंता होटल के पास प्रेमनगर निवासी कुंवर सिंह के 178 और 106 वर्ग मीटर के दो प्लॉट हैं जो एक दूसरे से लगे हुए बताए गए हैं। यह जमीन काफी कीमती बताई गई है। गत जुलाई में उनको पता चला कि सुद्धोवाला में अजंता होटल के पास उसकी जमीन पर कुछ लोग निर्माण कर रहे हैं। आननफानन में वह मौके पर पहुंचे तो निर्माण करने वाले ने बताया कि उसने यह जमीन खरीद ली है। इस पर कुंवर सिंह ने कहा कि मैंने तो अपनी जमीन बेची ही नहीं है। दूसरे पक्ष ने दावा किया कि उसने कुंवर सिंह से ही यह जमीन खरीदी है।
इसके बाद 14 जुलाई को प्रेमनगर थाने में कुंवर सिंह ने तहरीर दी थी कि फर्जी तरीके से उसकी जमीन का किसी ने बैनामा कर दिया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर छानबीन की तो पता चला कि फर्जी बैनामे का सिंडीकेट जेल से संचालित हो रहा है और इस फर्जीवाड़े की असली जड़े जेल से जुड़ी हैं। सुद्धोवाला जेल में निरुद्घ बाबू सिंह की शह पर मुख्तियार ने पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। हरिद्वार के ज्वालापुर निवासी मुख्तियार को इस फर्जीवाड़े के लिए बाबू की तरफ से पैसे भी मिले थे। बाबू के इशारे पर ही मुख्तियार तहसील के कागजों में कुंवर सिंह बना। पुलिस ने मुख्तियार को हरिद्वार से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
दो को शिकार बना चुका है मुख्तियार
आम आदमी के लिए जिन दस्तावेजों की औपचारिकता थका देने वाली होती है। उसे जालसाज आसानी से बनवा लेते हैं। पुलिस के अनुसारी, इसी का शिकार टिहरी के रहने वाले सेना में सूबेदार लक्ष्मी सिंह गुसाईं और उत्तरकाशी निवासी सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी राजेंद्र सिंह भी हुए। दोनों लोग तहसील और मुख्तियार के चक्रव्यूह में फंसकर ठगी का शिकार बन गए। तहसीलों में जमीन की रजिस्ट्री के वक्त फिंगर प्रिंट से लेकर डिजिटल हस्ताक्षर तक लिए जाते हैं। इसके बावजूद जेल में बैठे सरगना सफलतापूर्वक जमीन का फर्जीवाड़ा करने में सफल हो रहे हैं।