ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
सहस्त्रधारा रोड स्थित मैसर्स चौहान इस्टेट डेवलपर्स ने पांच करोड़ रुपये की अघोषित आय कबूल की है। आयकर विभाग के सर्वेक्षण में उनकी यह अघोषित आय सामने आई है। इस पर अब आयकर अधिनियम के तहत टैक्स लगेगा जो कि वह दो निर्धारण वर्ष के भीतर जमा करेंगे। वहीं, आयकर की एक टीम ने चकराता रोड स्थित कुकरेजा फूड कांप्लेक्स में आयकर रिकवरी सर्वे किया, जिसमें साढ़े सात लाख रुपये जमा कराने पर गुलशन कुकरेजा ने सहमति दी है।
आयकर विभाग की टीम ने मुख्य आयकर आयुक्त प्रमोद कुमार गुप्ता के निर्देशों पर बृहस्पतिवार की देर रात तक मैसर्स चौहान इस्टेट डेवलपर्स के प्रतिष्ठान में सर्वेक्षण किया। यहां आयकर रिटर्न और बिल्डर के खर्चों में मेल नहीं था। सर्वे में बिल्डर के खाता-बही दुरुस्त नहीं पाए गए। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से भी आईटीआर में कम खर्च दिखाया गया था। जब आयकर टीम ने पूछताछ की तो बिल्डर दिगंबर सिंह चौहान ने पांच करोड़ रुपये की अघोषित आय कबूल की। उन्होंने यह भी बताया कि वह इसका करीब डेढ़ करोड़ रुपये टैक्स दो निर्धारण वर्ष में जमा कराएंगे। पहली किश्त के तौर पर करीब 75 लाख रुपये इसी साल मार्च में जमा कराएंगे। इसके बाद दूसरी किश्त अगले निर्धारण वर्ष में जमा कराएंगे। दूसरी ओर, आयकर की एक टीम ने कई बार नोटिस जाने के बाद भी टैक्स जमा न करने पर कुकरेजा फूड कांप्लेक्स में रिकवरी सर्वे किया। सर्वे में गुलशन कुकरेजा ने स्वीकार किया कि वह 7.58 लाख रुपये टैक्स 15 मार्च तक जमा करा देेंगे। मुख्य आयकर आयुक्त प्रमोद कुमार गुप्ता के मुताबिक टैक्स की चोरी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।