ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
पीओके में एयर स्ट्राइक के बाद उन परिवारों की चिंताएं भी बढ़ गईं जिनके अपने सीमा पर तैनात हैं। कोई मां अपने बेटे को फोन लगा रही थी तो किसी ने अपने पति की कुशलक्षेम जानी। एक बार बात कर जब मन नहीं भरा तो कई कई बार फोन कर सीमा के हालात के बारे में जानकारी ली।
ट्रांसपोर्ट नगर निवासी शक्ति देवी यहां अकेली रहती हैं। उनका 22 वर्षीय बेटा सुशांत पुलवामा में तैनात है। उन्होंने सोमवार शाम बेटे से बात की थी। मंगलवार को जैसे ही उन्होंने आतंकियों पर हवाई हमले की बात सुनी तो बेटे को फोन लगाना चाहा, लेकिन फोन नहीं लग सका। इस पर वे चिंतित हो गईं। उन्होंने कहा कि वे हर रोज शाम को बेटे से बात करती हैं। बेटा ही उन्हें फोन करता है। अब शाम को ही हालात के बारे में पता चल पाएगा। आतंकियों पर हमले की बात पर वे कहती हैं कि पाकिस्तान अगर इस बात से भी नहीं समझा तो कभी नहीं सुधरेगा। अच्छा होगा कि वह इस बात से सबक ले और अपनी हरकतों से बाज आए। इसी तरह गढ़ी कैंट निवासी सुमनलता के पति उरी में तैनात हैं। सुमनलता कहती हैं कि पति को अगले महीने छुट्टी आना था, लेकिन अब सुन रहे हैं कि छुट्टियां नहीं मिलेंगी। हर रोज शाम को उनसे बात होती है। सोमवार रात को भी उनसे बात हुई थी। उन्होंने इस बारे में कोई बात नहीं कही थी। फिर पता चला कि कार्रवाई तो तड़के साढ़े तीन बजे हुई थी।