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एमबीबीएस दाखिले के नाम धन ऐंठने वाले तीन ठग दबोचे

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एमबीबीएस में दाखिले के नाम धन ऐंठने वाले तीन दबोचे
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी का एक और मामला सामने आया है। इस बार एसटीएफ ने एक पीड़ित की शिकायत पर जांच करते हुए दाखिलों के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो बिहार के जबकि एक कर्नाटक का निवासी है।
बताया जा रहा है कि यह गैंग पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से संचालित हो रहा है। गिरोह ने देशभर में करोड़ों रुपये की ठगी की है। पुलिस ने रविवार को तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से दो दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ रिधिम अग्रवाल के अनुसार काफी समय से उन्हें सूचना मिल रही थी कि कुछ लोग दून और आसपास के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने के नाम पर ठगी कर रहे हैं। तहकीकात के दौरान पता चला कि गत सात जुलाई को विकास गोयल निवासी सेक्टर पांच, करनाल हरियाणा से कुल 23 लाख रुपये की ठगी की गई थी। गोयल ने पटेलनगर क्षेत्र के एक मेडिकल कॉलेज में अपनी बेटी को एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के लिए कुछ लोगों को 16 लाख रुपये डोनेशन और 6.95 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट (कॉलेज के नाम का) दिया था। इसके बाद आरोपियों ने गोयल से अतिरिक्त रुपयों की मांग की थी। यह रकम लेने के लिए आरोपी रविवार देर शाम देहरादून पहुंचे थे। इसी सूचना पर एसटीएफ की टीम ने निरंजनपुर मंडी के पास से तीन युवकों को गिरफ्तार कर लिया। युवकों ने अपने नाम अर्जुन सिंह उर्फ अमित कुमार निवासी लेन नंबर दो आगरा कैंट (मूल निवासी बिहार), जितेंद्र कुमार निवासी भोजपुर बिहार और राकेश उर्फ कुमार स्वामी निवासी कर्नाटक बताए हैं। तीनों के खिलाफ पटेलनगर कोतवाली में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उनके गिरोह के मुख्य सदस्य कोलकाता में रहते हैं। उन्हीं के कहने पर वे इस काम को करते हैं। इनके पास से कुछ फर्जी दस्तावेज और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।
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ठगी के लिए बनाई है कंसलटेंट एजेंसी
-कोलकाता में है कंसलटेंट एजेंसी का ऑफिस, वेबसाइट भी है।
-नीट का रिजल्ट आने के बाद लोग करते हैं एजेंसी से संपर्क और होते हैं शिकार।
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। एमबीबीएस में दाखिला दिलाने वाले ठग गिरोह के सदस्य कंसलटेंट एजेंसी के माध्यम से छात्रों और अभिभावकों को जाल में फंसाते हैं। नीट का रिजल्ट आने के बाद छात्र और अभिभावक इसी कंसलटेंट एजेंसी के जरिए जालसाजों के संपर्क में आते हैं। यह गिरोह उत्तराखंड के अलावा कई अन्य राज्यों में भी सक्रिय हैं। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने एसटीएफ को कई ऐसी बातें भी बताई हैं, जिनकी फिलहाल जांच चल रही है।
दरअसल, कई साल से एमबीबीएस में दाखिलों पर मैनेजमेंट कोटे आदि की सीटों पर भी जांच एजेंसियां नजर बनाए हुए हैं। कई कॉलेजों में इस तरह की समितियां भी बनी हुई हैं जो कॉलेजों के अधिकारियों को मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर डील करने से रोकती हैं। ऐसे में इस गिरोह ने दूसरे तरीकों से काम लेना शुरू किया। दो साल पहले कोलकाता में एक कंसलटेंट एजेंसी खोली गई थी। इस एजेंसी की वेबसाइट भी है और कई सदस्यों के नंबर अपलोड हैं। नीट का रिजल्ट आने के बाद लोग इस कंसलटेंट एजेंसी के संपर्क में आते हैं। इसके बाद कथित कंसलटेंट एजेंसी के लोग दाखिले का भरोसा दिलाते हैं। इसके लिए वे पैसे लेने के बाद दाखिले के फर्जी दस्तावेज बनाकर लोगों को देते हैं, लेकिन जब छात्र कक्षा ज्वाइन करने कॉलेज पहुंचते हैं तो उनकी पोल खुल जाती है। आरोपियों ने देहरादून के अलावा उड़ीसा व बिहार के कई मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने की बात स्वीकार की है।
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कुछ दिन पहले भी आया था नाम
एमबीबीएस में मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर दाखिले दिलाने के नाम पर ठगी करने का एक और मामला पिछले दिनों भी सामने आया था। इसमें भी पटेलनगर क्षेत्र के एक मेडिकल कॉलेज के एक अधिकारी का नाम सामने आया था। आरोपी ने देहरादून की एक महिला से उनकी बेटी का एडमीशन कराने के नाम पर सात लाख रुपये ठगे थे।
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