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क्यों कूदा जितेंद्र : पत्नी का ताना या पुलिस की मनमर्जी?

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रुद्रेश आर्य, देहरादून
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दुर्घटनाग्रस्त कार में डोडा पोस्त मिलने के मामले में आरोपी बनाए गए दिव्यांग जितेंद्र के एनडीपीएस कोर्ट की तीसरी मंजिल से कूदने पर कई सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ पुलिस इसे पत्नी के ताने के कारण आत्महत्या का प्रयास बता रही है तो दूसरी ओर पुलिस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि एक आरोपी को खुद पुलिस ने ही बचाया है।
दरअसल, कार दुर्घटना में उसमें सवार तीन लोगों में से एक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। दून अस्पताल में भर्ती दो घायलों जितेंद्र और पंजाब निवासी बंका के खिलाफ पुलिस ने डोडा पोस्त की तस्करी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। लेकिन सवाल यह है कि पुलिस ने केवल जितेंद्र को ही कोर्ट में क्यों पेश किया? जबकि, दूसरा आरोपी बंका अस्पताल से कब और कहां चला गया पुलिस इसकी जानकारी से इनकार कर रही है। अब जितेंद्र के कथित रूप से आत्महत्या के प्रयास के बाद मसूरी पुलिस भी घिरती नजर आ रही है।
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एसएसपी ने मामले में भले ही अभिरक्षा से भागने का केस दर्ज करने का आदेश दिया है, लेकिन तमाम सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं। क्योंकि, कार खाई से बरामद करने के बाद दोनों को दून अस्पताल में ही भर्ती कराया गया था। साथ ही दोनों के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया। इसकी पुष्टि खुद पुलिस की जांच करती है। जितेंद्र को तो चार जुलाई को मुकदमा दर्ज होने के बाद के बाद गिरफ्तार दिखाया गया, मगर दूसरा आरोपी दून अस्पताल से कहां गया, किसी को पता नहीं। एसएसपी निवेदिता कुकरेती का कहना है कि चार जुलाई को रात 11.55 बजे दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इनमें से एक पता नहीं कब डिस्चार्ज होकर चला गया। डॉक्टरों के कहने पर जितेंद्र को सोमवार को डिस्चार्ज कराने के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां यह घटना घटी।
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