सावधान! यहां पुलिस लाचार है, अपनी सुरक्षा खुद करें
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
राजधानी में ठग और लुटेरों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। शहर में एक महीने में ठगी और चेन स्नेचिंग की दर्जनों वारदातें हो चुकी हैं। ठग नए-नए तरीकों से लोगों को चूना लगा रहे हैं। चेन लुटेरों ने महिलाओं में खौफ उत्पन्न कर दिया है। पुलिस चंद मामलों का खुलासा करने का दावा तो करती है, लेकिन इसका कोई खास असर नहीं दिखता।
एकाध आरोपी के पकड़े जाने पर अलग-अलग थाना पुलिस में उसके सहारे अन्य वारदातों का खुलासा करने की होड़ मच जाती है। एक ही आरोपी पर कई वारदातों को मढ़ दिया जाता है। इससे बाद में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगते हैं। खास बात ये है कि वारदातों के खुलासे के चंद घंटे बाद या अगले दिन फिर उसी तरह से वारदात को अंजाम दे दिया जाता है। ऐसे में पुलिस के ये खुलासे भी सवालों के घेरे में आ जाते हैं।
ऐसा ही मामला पिछले दिनों सामने आया था जब चोरी के मामलों में पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस पर झूठे फंसाने का आरोप लगाया था। इसके अलावा पिछले माह रायवाला थाना पुलिस पर बेटे को चरस तस्करी के मामले में झूठा फंसाने की बात कहते हुए एक महिला परिवार सहित थाने के सामने धरने पर बैठ गई थी।
राजधानी में एक माह में चेन स्नेचिंग और ठगी के दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। जिन रास्तों पर पुलिस सघन चेकिंग का दावा करती है, उन्हीं से होते हुए लुटेरे एक के बाद एक वारदात को अंजाम देकर निकल जाते हैं। नेहरू कॉलोनी, फिर वसंत विहार, सिटी कोतवाली और पटेलनगर कोतवाली क्षेत्र में एक हफ्ते में चेन स्नेचिंग की छह वारदातें हो चुकी हैं।
वारदात के बाद जानकारी मिलते ही पुलिस सबसे पहले सीसीटीवी कैमरों की ओर दौड़ती है, जिसमें अगर कुछ मिल गया तो उसी मदद से पड़ताल शुरू, नहीं तो जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। कमोबेश यही हाल ठगी के मामलों में भी हो रहा है। पिछले दिनों कुछ मामलों का खुलासा तो किया गया था, लेकिन अब फिर से वारदातों को रोक पाने में पुलिस लाचार दिख रही है। ठगी के मामलों में पुलिस का अलग ही तर्क है। ज्यादातर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लोगों को झांसे देने वाली घटनाओं में पुलिस भी ज्यादा कुछ नहीं कर सकती है। बरहाल, फिलहाल शहर को ठग और लुटेरों की गिरफ्त से छुड़ाने में पुलिस लाचार ही दिख रही है।