ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
त्यूनी के झिटाड़ निवासी मोती सिंह हत्याकांड मामले में शव आसन बैराज से बरामद होने से साफ हो गया है कि हत्यारोपी पुलिस को गुमराह कर रहे थे। यही वजह रही कि युवक की हत्या के दो माह बाद शव बरामद किया जा सका है। पुलिस अब जल्द ही न्यायालय में धारा 302 में आरोपपत्र दाखिल करेगी।
उल्लेखनीय है कि हत्यारोपी रिमांड में लेने के बावजूद शव को ढालीपुर बैराज से ऊपर शक्तिनहर में डाले जाने की बात कह रहे थे। हत्यारोपियों की निशानदेही पर पुलिस कुछ दिनों तक डाकपत्थर झूला पुल और फिर ढालीपुर बैराज के आसपास शव तलाशती रही। इसके लिए पुलिस ने वाटर ड्रोन कैमरे की भी मदद ली। एसडीआरएफ की टीम कई दिनों तक इस काम में जुटी रही, लेकिन युवक का शव बरामद करने में सफलता नहीं मिली। शव बरामद नहीं होने से पुलिस ने हत्यारोपियों के खिलाफ साक्ष्य छिपाने की धारा लगाई थी।
मामले में शुरू से ही जल विद्युत निगम के अधिकारियों का कहना था कि शव यदि ढालीपुर बैराज से ऊपर डाकपत्थर की ओर डाला गया है, तो उसका ढालीपुर बैराज के इंटेक से होकर नीचे जाना संभव नहीं है। अब शव के आसन बैराज से मिलने से यह साफ हो चुका है कि शव को ढालीपुर बैराज से नीचे की ओर डाला गया।
ये है मामला
दो माह पूर्व 16 जनवरी को मोती सिंह की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। मामले में पुलिस ने नवाबगढ़ से आरोपी नदीम और अहसान को गिरफ्तार किया था। हत्यारोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने सहारनपुर के बिहारीगढ से मोती सिंह की कार बरामद और मोबाइल बरामद करने के साथ ही हत्या में प्रयुक्त ईंट भी बरामद की थी। हत्यारोपियों ने मोती सिंह का शव शक्तिनहर में फेंकने की बात कबूल की थी। लेकिन, पुलिस शव बरामद नहीं कर पाई थी। शव ना मिल पाने के चलते 31 जनवरी को जौनसार बावर परगने के लोगों ने विकासनगर बाजार को बंद कराकर एनएच पर जाम लगाया था। भीड़ के आक्रोश को रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था।
पुलिस ने इस मामले में हत्यारोपियों के खिलाफ साक्ष्य छिपाने की धारा 201 लगाई थी, क्योंकि अब शव बरामद हो चुका है, ऐसे में पुलिस जल्द ही न्यायालय में धारा 302 में आरोपपत्र दाखिल करेगी।
- भूपेंद्र सिंह धोनी, पुलिस क्षेत्राधिकारी, विकासनगर