ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
सेलाकुई। औद्योगिक क्षेत्र सेलाकुई से सटे शंकरपुर गांव के लोग बारूद के ढेर पर बैठे थे। गांव में करीब तीन माह से मौत की फैक्ट्री संचालित हो रही थी, लेकिन न पुलिस प्रशासन इसकी भनक लगी और न ही खुफिया विभाग को। हैरत की बात है कि स्थानीय लोग भी इस बात से बेखबर थे कि यह अवैध पटाखा फैक्ट्री कभी भी क्षेत्र को दहला सकती थी।
अवैध फैक्ट्री के करीब ही एक निजी लॉ कॉलेज और घनी आबादी क्षेत्र है। ऐसे में सैकड़ों की आबादी मौत के मुहाने पर खड़ी थी। जब पुलिस प्रशासन की टीम ने फैक्ट्री में छापा मारा, तो भनक लगते ही वहां काम कर रहे मजदूर फैक्ट्री के पीछे के दरवाजे से भाग गए। इसी दरवाजे के पास भारी मात्रा में विस्फोटक और ज्वलनशील पदार्थ देख पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। यहां से पुलिस ने 575 किलोग्राम पोटेशियम, 975 ग्राम सल्फर और 525 किलोग्राम कोयला पाउडर बरामद किया। इतनी भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ कभी भी किसी बड़े हादसे की वजह बन सकते थे। अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि फैक्ट्री में काम करने वाले सभी मजदूर बाहरी थे। इनके रहने की व्यवस्था फैक्ट्री में ही की गई थी। स्थानीय व्यक्तियों के पूछे जाने पर उन्हें नाखून पॉलिश बनाने की बात बताई जाती थी। अवैध फैक्ट्री चलाने वाले गिरोह का सरगना पंकज बावेजा चोरी-छिपे विस्फोटक पदार्थों को किसी अन्य पते पर मंगवाता था। जहां से यह विस्फोटक सामग्री फैक्ट्री तक पहुंचाई जाती थी। पुलिस अब इस बात का पता लगाने में भी जुट गई है कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री आखिर कहां से लाई गई।