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प्रधान ने एक लाख रुपये में बेच डाले 49 पेड़

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। अवैध पेड़ों के कटान के मामले में भले ही नायब तहसीलदार घूसखोरी के आरोप में विजिलेंस के हत्थे चढ़ गए, प्रकरण में औरों पर भी आंच आनी तय है। रायवाला की प्रधान राखी गिरि द्वारा पेड़ों को औने-पौने दामों में बेचा जाना, सेक्रेटरी की ओर से कोई आपत्ति न उठाना और बीडीओ की ओर से प्रधान को जांच में क्लीनचिट देना कहीं न कहीं गड़बड़ी की फेहरिस्त लंबी होती दिख रही है। रायवाला की प्रधान राखी गिरि ने प्रशासन को लिखे पत्र में माना है कि उन्होंने यूकेलिप्टस के कुल 49 पेड़ नासमझी के चलते केवल एक लाख दो हजार रुपये में नीलाम कर दिए। ग्राम प्रधानों के साथ सेक्रेटरी की नियुक्ति ही सरकारी योजना और प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए होती है। इसके बावजूद सरकारी कर्मचारियों ने नियमों को कूड़ेदान में डाल दिया। रायवाला ग्राम प्रधान राखी गिरि का कहना है कि उन्हें नीलामी के लिए अपनाई जाने वाली सरकारी प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी।
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इसका आभास तब हुआ जब आरटीआई के तहत सूचनाएं मांगी जाने लगीं। मजे की बात तो यह है कि कुल 49 पेड़ों के कटान की नीलामी का फैसला खुली बैठक में हो गया और सेक्रेटरी ने भी हस्ताक्षर कर दिए। दस्तावेजों के मुताबिक पेड़ों की पहली नीलामी 24 फरवरी 2015 में जबकि दूसरी 29 मई 2015 को हुई। इस दौरान पहले चरण में 38 और दूसरे में 11 पेड़ों को नीलाम किया गया। नियमानुसार उक्त नीलामी से अर्जित धनराशि को ग्राम पंचायत के बैंक खाते में भी डाला गया। बैंक रिकार्ड के मुताबिक प्रधान की ओर से बैंक में पहली धनराशि 22 हजार रुपये 24 फरवरी 2015 में जमा की गई। दूसरी राशि 40 हजार रुपये 29 मई 2015 को जमा हुई। खास बात यह है कि तीसरी बार 40 हजार रुपये 19 नवंबर 2015 में पंचायत खाते में डाले गए। सवाल उठता है कि सरकारी पैसा समय पर क्यों नहीं जमा किया गया।

बीडीओ ने भी जांच में जमकर दिखाई उदारता
पेड़ नीलामी के बाद जब आरटीआई का दौर चला तो ग्राम से लेकर तहसील स्तर के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध दिखने लगी। प्रधान ने तो मान लिया कि अनजाने में उन्होंने कीमती पेड़ों को बेहद कम कीमतों में नीलाम कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि खंड विकास अधिकारी ने भी अपनी जांच में बेधड़क सब कुछ न्याय संगत दिखा दिया। पूरी जांच में यह तय नहीं किया गया कि राजस्व हानि पहुंचाने पर दायित्व किसका है। बड़े सलीके से जांच अधिकारी ने सभी आरोपियों को क्लीन चिट दे दिया। इस सिंडीकेट में करीब 5 लाख की कीमत वाले यूकेलिप्टस पेड़ों को महज एक लाख दो हजार में नीलाम कर राजकोष को करारी चोट लगाई गई।
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एक साल बाद होना था सेवानिवृत्त
ऋषिकेश। नायब तहसीलदार मुन्ना सिंह चौहान को सेवानिवृत्त होने में करीब एक साल ही शेष रह गया था। इस उम्र में भी काम के प्रति उनकी फुर्ती, अनुुभव और सुलझा हुआ रवैया देख एसडीएम प्रेमलाल भी प्रभावित थे। मंगलवार को जब घूस लेते पकड़े जाने की सूचना मिली तो वे भी अचंभित रह गए। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि यकीन करना मुश्किल हो रहा है। नायब तहसीलदार को रिश्वत लेते नगर के ही एक आश्रम में पकड़ा गया। तब तक तहसील कर्मचारियों और अधिकारियों को इसकी भनक नहीं लग पाई थी। करीब 10:30 पर नायब तहसीलदार को विजिलेंस टीम हिरासत में लेकर तहसील में प्रवेश किया। यहां कमरा नंबर- 12 में प्रवेश के बाद अंदर से बंद कर लिया गया। इस दौरान कोतवाल रितेश शाह भी पूछताछ वाले कमरे में पहुुुंचे। करीब एक घंटे की पूछताछ और दस्तावेज खंगालने के बाद विजिलेंस टीम नायब तहसीलदार को लेकर देहरादून रवाना हो गई।
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