ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
रुड़की बाजार से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई महिला की पहचान सात साल बाद हो पाई है। मृतक के बच्चों को भी अब जाकर पता लग पाया है कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं रही। चीला शक्ति नहर के किनारे से साढ़े चार साल पूर्व मिली एक महिला के शव की पहचान ऑपरेशन शिनाख्त की टीम ने करवाई। महिला की पहचान लढौरा निवासी दीपा पाल के रूप में हुई है, जिसकी गुमशुदगी रुड़की के गंगनहर थाने में जुलाई 2011 को दर्ज है। टीम को इस मामले में कामयाबी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली है।
ऑपरेशन शिनाख्त की कोटद्वार टीम के प्रभारी मनोज मेनवाल के अनुसार बीती 13 जनवरी 2014 को लक्ष्मणझूला थाने की चीला चौकी के अंतर्गत शक्तिनहर के किनारे एक महिला का शव मिला था। पुलिस अज्ञात महिला की पहचान में जुटी थी, मगर सफलता नहीं मिली। मामला ऑपरेशन शिनाख्त की टीम तक पहुंचा, तो टीम ने सोशल मीडिया के माध्यम से महिला की फोटो और कपड़ों के फोटोग्राफ्स वायरल किए। शिनाख्त में जुटी टीम को पता चला कि फोटो से मिलते-जुलते हुलिए की महिला की गुमशुदगी रुड़की स्थित गंगनहर कोतवाली में दर्ज है।
उप निरीक्षक कृपाल सिंह ने बताया कि गंगनहर पुलिस के माध्यम से महिला के परिजनों से संपर्क किया गया। महिला के भाई संजय कुमार निवासी रुड़की को महिला की फोटो व कपड़ों की तस्वीरें भेजी गई, जिसके बाद उसने महिला की पहचान दीपा पाल (35) पत्नी मदन पाल निवासी लढौरा, हरिद्वार के रूप में की। बताया कि वह पति मदन पाल के साथ रुड़की में बाजार में खरीदारी के लिए आई थी और इसके बाद दोनों लापता हो गए थे। बताया कि बीती चार जुलाई 2011 को इस मामले में गंगनहर कोतवाली में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। टीम ने महिला के कपड़े और उसकी पीएम रिपोर्ट संजय के सुपुर्द कर दी है।
अपने पीछे चार बच्चों को छोड़ गई दीपा
दीपा पाल के भाई संजय ने बताया कि दीपा अपने पीछे चार बच्चे छोड़ गई है, जिनमें 16 वर्षीय आदित्य, मंशा (14), उत्सव (10) और हैप्पी (7) साल शामिल हैं। बताया कि उनकी देखरेख परिवार ही कर रहा है। दीपा के पति की तलाश के लिए वह लगातार पुलिस के संपर्क में हैं। उनकी भी गुमशुदगी गंगनहर कोतवाली में दर्ज है।