ब्यूरो/साहिया।
राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान साहिया में हजारों रुपये के घोटाले का मामला प्रकाश में आया है। जहां दैनिक श्रमिकों की तैनाती, कौशल विकास योजना और खराब मशीनों की मेंटीनेंस के नाम पर हजारों रुपये के बजट को ठिकाने लगा दिया गया। मामले का खुलासा आरटीआई के तहत हुआ है। आरटीआई और सामाजिक कार्यकर्ता तरसेब सिंह तोमर ने जिलाधिकारी से मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
तरसेब सिंह तोमर ने बताया कि आरटीआई के तहत यह तथ्य प्रकाश में आया कि संस्थान में नवंबर 2009 से मई 2015 तक दैनिक श्रमिकों की तैनाती के नाम पर हजारों रुपये के बजट को ठिकाने लगा दिया गया। श्रमिकों के रजिस्ट्रर और मस्टोरल में भारी असमानता है। कई श्रमिकों के नाम और पता पूरी तरह से फर्जी हैं। इसके साथ ही संस्थान में वर्ष 2017 में आकाशीय बिजली गिरने से तबाह हुए मशीनों की बिना कोई विज्ञप्ति निकाले ही मरम्मत करा दी गई। कई मशीनों की मेंटीनेंस पर आए खर्चे को बहुत अधिक दिखाया गया हैं। घोटाले का अंदाजा महज इसी से लगाया जा सकता है कि 10 केवीए के डीजल जेनरेटर की मरम्मत में आए खर्चे को करीब 59950 रुपये दर्शाया गया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के नाम पर आयोजित होने वाले शिविर में भी बजट को ठिकाने लगाने का काम किया गया है। कैंपों के आयोजन में जिन बिलों को पास किया गया है, उनमें टीन और जीएसटी नंबर तक दर्ज नहीं है। आरोप लगाया कि प्रधानाचार्य और कॉलेज स्टॉफ ने मिलीभगत कर सरकारी धनराशि को ठिकाने लगाया है। प्रधानाचार्य डीसी गुप्ता ने कहा कि वह और उनका स्टॉफ मामले की जांच के लिए पूरी तरह से तैयार है।