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वन विभाग में एक और भर्ती घोटाला उजागर

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वन विभाग में एक और भर्ती घोटाला उजागर
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अरविंद सिंह
देहरादून। हरिद्वार वन प्रभाग में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तीन कर्मचारियों की नियुक्ति करने का मामला सामने आया है। आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में प्रकरण उजागर होने के बाद पीएमओ के आदेश पर शासन स्तर से जांच कराई जा रही है। सन 2016 में हुई भर्ती मेें डीएफओ सहित कई अन्य अफसरों ने शैक्षिक दस्तावेजों की जांच कराए गए बगैर नियुक्ति कर दी। उल्लेखनीय है कि राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में कर्मचारियाें की भर्ती में हुई गड़बड़ियों की जांच अभी शासन स्तर से चल रही है। अब इस प्रकरण की भी जांच होने से संबंधित अधिकारियों के होश उड़े हुए हैं।
राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के हरिद्वार वन प्रभाग में सन 2016 में वन आरक्षी पद पर भर्तियां की गईं थीं। जिसमें तत्कालीन डीएफओ समेत अन्य अफसरों ने अभ्यर्थियाें के शैक्षिक दस्तावेजों की जांच कराए बगैर ही नियुक्ति दे दी। अफसरों का यह गोलमाल उस समय उजागर हुआ जब विनोद कुमार जैन ने सूचना के अधिकार के तहत भर्ती किए गए वन आरक्षियों के शैक्षिक दस्तावेजों पर सवाल उठाते हुए जानकारी मांगी। विनोद जैन ने जब दस्तावेजों की अपने स्तर से जांच कराई तो दो वन आरक्षियों के दस्तावेजों में गड़बड़ियां पाई गईं। उन्होंने प्रकरण से सचिव वन को अवगत कराते हुए प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। साथ ही प्रकरण से प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भी अवगत कराते हुए जांच की मांग की। जिस पर पीएमओ ने प्रमुख सचिव (वन) को जांच कराने के साथ ही कार्रवाई से अवगत कराने के आदेश दिए थे।
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मामले में पीएमओ से जांच के आदेश आने के बाद राज्य के संबंधित उच्च अधिकारी हरकत में आए। उप सचिव (वन) ने इस संबंध में प्रमुख वन संरक्षक (प्रशासन) से रिपोर्ट तलब की। जिस पर प्रमुख वन संरक्षक ने 28 मार्च 2018 को शासन को भेजी रिपोर्ट मेें बताया कि तीन वन आरक्षी श्यामलाल पुत्र बाबूराम, विनोद कुमार पुत्र रतनलाल और संतोष कुमार पुत्र मुंशीलाल के दस्तावेजों में खामियां पाई गईं हैं। इनमें श्यामलाल का हाईस्कूल उत्तीर्ण प्रमाण-पत्र उत्तराखंड व यूपी में मान्य ही नहीं है। जबकि विनोद कुमार के शैक्षिक दस्तावेजाें में माता-पिता के नामाें व जन्मतिथि में भिन्नता पाई गई है। तीसरे वन आरक्षी संतोष कुमार के दस्तावेजोें के संबंध में सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई है। लेकिन संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य ने जानकारी दी है कि इस नाम और रोल नंबर का कोई भी छात्र व्यक्तिगत परीक्षा में उनके विद्यालय में पंजीकृत ही नहीं है। सवाल उठता है कि इन वन आरक्षियों के शैक्षिक दस्तावेजों जांच किए बिना ही किस आधार पर अधिकारियों ने उनकी नियुक्ति की। यदि प्रकरण की गंभीरता से जांच की गई तो डीएफओ सहित कई अफसरों पर गाज गिर सकती है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में फर्जी तरीके से कई कर्मचारियों की भर्ती का मामला सामने आया था। जिसमें पार्क के तत्कालीन उप निदेशक एचके सिंह को आरोप-पत्र भी जारी किया गया है। इस प्रकरण की भी शासन स्तर से जांच कराई जा रही है।
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