रतनमणी डोभाल
हरिद्वार।
नगर निगम में लाखों रुपये का कंप्यूटर घोटाला उजागर हुआ है। शासन एवं सूचना आयोग के आदेश पर जिलाधिकारी ने सिटी मजिस्ट्रेट को जांच अधिकारी नामित कर नगर निगम के कंप्यूटरों की जांच कराई। जांच में उजागर हुआ कि नगर निगम को आईटीडीए की ओर से 15 फरवरी 2005 को 41 कंप्यूटर निशुल्क दिए गए थे। जिनको स्टोर कीपर ने 28 जुलाई 2005 एवं 27 व 28 अगस्त 2005 को रजिस्टर में दर्ज किया था। जांच में 11 कंप्यूटर नहीं पाए गए। जबकि 17 कंप्यूटर सप्लाई किए गए नंबरों से मिलान नहीं हो रहे हैं।
जांच अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट जय भारत सिंह ने जिलाधिकारी को 14 जुलाई को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। जिसको जिलाधिकारी की ओर से लोक सूचना अधिकारी संगीता कनौजिया ने 31 जुलाई को सचिव उत्तराखंड सूचना आयोग को भेजा है। जिसकी प्रति आरटीआई कार्यकर्ता रमेश चंद्र शर्मा को भी उपलब्ध कराई गई है। सिटी मजिस्ट्रेट ने जांच रिपोर्ट में बताया कि नगर निगम को प्राप्त 41 कंप्यूटरों में से 11 कंप्यूटर गायब पाए गए हैं जिनके संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई। जबकि 24 कंप्यूटर खराब तथा स्टोर में बताए गए। खराब कंप्यूटरों की क्रम संख्या का मिलान करने पर 17 कंप्यूटरों का मिलान नहीं हुआ है। उन्होंने गायब 11 कंप्यूटरों की कीमत नगर निगम के तत्कालीन स्टोर कीपर रामकुमार वर्मा, गौहर हयात, राजेंद्र घाघट से वसूल करने की सिफारिश की है।
कंप्यूटरों की तकनीकी जांच की संस्तुति
जांच अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट जय भारत सिंह ने खराब बताए गए 24 कंप्यूटरों पर संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने जांच रिपोर्ट में बताया कि 24 कंप्यूटरों की क्रम संख्या का मिलान करने पर 17 का मिलान नहीं हो पाया है। इसके लिए उन्होंने जिलाधिकारी को प्रत्येक मॉनिटर, सीपीयू व यूपीएस के क्रमांक की जांच कराने के लिए नगर निगम के एसएनए, जिला सूचना विज्ञान केंद्र से एक अधिकारी एवं कार्यकारी मजिस्ट्रेट की टीम बनाकर जांच कराने की संस्तुति की है। जांच अधिकारी को प्रथम दृष्टया लगा कि जो 17 कंप्यूटर स्टोर में हैं वे नगर निगम को दिए गए कंप्यूटरों में से नहीं हैं।
बिना कार्यभार का स्टोर कीपर
जांच प्रक्रिया के दौरान वर्तमान स्टोर कीपर ओमप्रकाश मौर्य ने बताया कि उसे स्टोर कीपर का चार्ज तो दिया गया है, परंतु कार्यभार की हस्तांतरण प्रक्रिया लिखित रूप में नहीं हुई है। जांच अधिकारी का कहना है कि किसी भी स्टोर कीपर ने 11 कंप्यूटरों के गायब होने का तथ्य उच्चाधिकारियों के संज्ञान में नहीं लाया। ऐसे में गायब कंप्यूटरों की धनराशि समानुपातिक रूप से वसूली की जानी चाहिए।
प्रकरण काफी पहले का है
नगर आयुक्त अशोक कुमार पांडेय का इस संबंध में कहना है कि कंप्यूटरों के गायब होने का प्रकरण काफी पहले का है। चूंकि इस प्रकरण की शासन के साथ सूचना आयोग द्वारा भी जांच कराई जा रही है। उन्हें जो भी आदेश प्राप्त होगा उसका अनुपालन किया जाएगा।