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सड़क दुघर्टना में दोषी सिटी बस चालक दोषमुक्त

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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सड़क दुर्घटना के एक मामले में सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया है। सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को पलटतेे हुए दोषी चालक को दोषमुक्त करार दिया है। सत्र न्यायालय ने टिप्पणी में कहा है कि मुकदमे में गवाहों की संख्या नहीं उसका विश्वसनीय होना अधिक महत्वपूर्ण होता है। इस मामले में अभियोजन की ओर से पेश किए गए कई गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाया गया है।
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मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता बीके बछेती ने बताया कि विगत 12 अप्रैल 2004 को कोतवाली क्षेत्र में एक सिटी बस चालक पर एक व्यक्ति के कुचलने संबंधी मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में चालक रवि मेहरा निवासी रांझावाला रायपुर को अभियुक्त बनाया गया था। गत 25 अप्रैल 2018 निचली अदालत ने रवि मेहरा को दोषी करार देते हुए एक साल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के विरोध में सत्र न्यायालय में अपील की गई थी। निचली अदालत ने एक गवाह जिसने खुद को बस के दस मीटर पीछे चलना बताया था को महत्वपूर्ण गवाह माना था। इसके अलावा उसके मौसेरे भाई को भी अभियोजन ने प्रमुख गवाह के तौर पर प्रस्तुत किया था। इस मामले में सत्र न्यायालय ने दस मीटर पीछे चलने वाले गवाह की गवाही सजा के लिए काफी नहीं मानी। इसके अलावा मौसेरे भाई की गवाही भी निराधार मानी। कोर्ट ने कहा है कि यदि मौसेरा भाई वास्तव में मरने वाले का रिश्तेदार था तो वह उस वक्त दून अस्पताल में मौजूद क्यों नहीं था? जबकि, अस्पताल के डेथ मेमो में व्यक्ति को अज्ञात में दर्शाया और अज्ञात में दर्शाते हुए ही उसे मोर्चरी में रखवाया गया। इस मामले में न तो बस की टेक्किल रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी और न ही अस्पताल के डॉक्टर को गवाह बनाया गया था। इन्हीं सब तथ्यों को देखते हुए अदालत ने रवि मेहरा को दोषमुक्त कर दिया है।
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