सरकार की सख्ती से एजेंसियों की बढ़ी मुश्किलें
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना (आईएलएसपी) के तहत रोजगारपरक व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के नाम पर 15 लाख रुपये का गोलमाल करने वाली एजेंसियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अभी तक एजेंसियां इसे हल्के में लेकर प्रशिक्षणार्थियों का ब्योरा देने में टालमटोल कर रहीं थीं, लेकिन अब मंगलवार तक जवाब नहीं देने पर कार्रवाई के नाम से एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।
उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति की ओर से आईएलएसपी में पर्वतीय क्षेत्र के युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के लिए 22 एजेंसियों का चयन किया गया था। इनमें से सात एजेंसियों को प्रशिक्षण शुरू करने के लिए 15 लाख रुपये की राशि दो किश्तों में दी गई। समिति की ओर से जब एजेंसियों ने प्रशिक्षणार्थियो का रिकॉर्ड मांगा गया, तो गोलमाल का खुलासा हुआ। कई बार पत्र जारी करने के बाद भी एजेंसियों ने जवाब नहीं दिया। यहां तक विभागीय बैठकों में भी इन एजेंसियों की तरफ से उपस्थिति दर्ज नहीं कराई गई। जबकि नियमों के अनुसार एजेंसियों को प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी की बायोमीट्रिक उपस्थिति लेने के साथ एमआईएस पर उनका पूरा वितरण देना होता है। अब सरकारी की ओर से जारी नोटिस का जवाब देने के लिए एजेंसियों के पास सोमवार का दिन ही शेष है। 26 दिसंबर को जवाब नहीं मिलने पर एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नौ जिलों के 37 ब्लाकों में परियोजना का क्रियान्वयन
अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, देहरादून व पौड़ी जिले के 37 विकासखंडों में एकीकृत आजीविका परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। युवाओं का कौशल विकास करने के उद्देश्य से 33 विभिन्न ट्रेडों में व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जुलाई 2017 तक नौ जिलों में 2200 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया। जबकि करीब 1500 युवा रोजगारपरक व्यावसायिक प्रशिक्षण ले रहे हैं।
कोट...
नोटिस का जवाब मिलने के बाद सात एजेंसियों के खिलाफ अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। व्यावसायिक प्रशिक्षण के नाम पर गोलमाल करने वाली एजेंसियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा। वर्तमान में 14 एजेंसी के माध्यम से करीब 1500 युवाओं को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि प्रशिक्षण देने के बाद युवाओं का प्लेसमेंट करे।
- राम बिलास यादव, अपर सचिव, ग्राम्य विकास