ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
जोहड़ी गांव में सरकारी रिकार्ड में हेराफेरी कर ग्राम समाज की करोड़ों की जमीन कब्जाने का यह मामला एसआईटी में आखिर क्यों दबा रहा, यह बड़ा सवाल है। छोटे मामलों में मुकदमे दर्ज कराकर वाहवाही लूटने वाली एसआईटी और प्रशासनिक अधिकारी घपले के पुख्ता साक्ष्य होने के बाद भी चुप्पी साधे रहे। दो साल से फाइल इधर से उधर दौड़ रही थी। मुकदमे का कौन वादी होगा और दोषी राजस्व अधिकारियों को चिह्नित करने में ही मामला उलझा रहा। शायद एडीजी अशोक कुमार दखल नहीं देते तो यह फाइल अभी और दबी रहती।
राजपुर थाना क्षेत्र के जोहड़ी गांव में ग्राम समाज की जमीन की हेराफेरी का यह प्रकरण एसआईटी के पास कई सालों से है। सूत्रों की मानें तो 2016 में एसआईटी जांच में यह तथ्य आ गया था कि सरकारी रिकार्ड में हेराफेरी कर ग्राम समाज की जमीन में घपला हुआ है। एसआईटी में यह मामला सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा था, क्योंकि इसमें कई बड़े लोगों के नाम शामिल थे। तब से यह मामला एसआईटी जांच में ही उलझा रहा। एसआईटी ने इसे बला मानकर कमिश्नर आफिस को भेज दिया था। जहां से फाइल जिलाधिकारी आफिस पहुंच गई। पहले तो दोषी राजस्व अधिकारियों को चिह्नित करने को लेकर मामला फंसा रहा। बाद में मुकदमे का वादी कौन बनेगा, इस पर रस्साकशी चलती रही। कुल मिलाकर ग्राम समाज की जमीन में घपले की फाइल दबती चली गई। प्रधान दुर्गेश गौतम और पूर्व फौजी की शिकायत पर अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने पत्रावली तलब की तो पूरी तस्वीर साफ हो गई। ऐसे में एसआईटी और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठने लाजिमी हैं।
--------
एसआईटी जांच में सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी की पुष्टि के बाद फाइल को कमिश्नर आफिस भेजा गया था, जिसमें दोषी राजस्व अधिकारियों को चिहिंत करने का अनुरोध किया गया था। एसआईटी की तरफ से कई रिमांडर भी दिए गए थे। हाल में ही कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस मामले में मुकदमा दर्ज कराने की सहमति बन गई।
- पुष्पक ज्योति, पुलिस उप महानिरीक्षक।
एसआईटी जांच रिपोर्ट के आधार पर जोहड़ी गांव में सरकारी रिकार्ड में हेराफेरी कर जमीन कब्जाने के मामले में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। राजपुर पुलिस को इस बाबत निर्देशित कर दिया गया है।
- निवेदिता कुकरेती, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक।