ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
हरिद्वार वन प्रभाग के श्यामपुर रेंज में 10 मई को रहस्यमय परिस्थितियों में मृत मिली बाघिन मामले की जांच वन संरक्षक अनुसंधान संजीव चतुर्वेदी को सौंपी गई है। बाघिन की मौत का कारण आपसी संघर्ष को बताया गया था, लेकिन घटनास्थल के साक्ष्य बाघिन के शिकार की आशंका की तरफ भी इशारा कर रहे थे।
इसे लेकर प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव डीवीएस खाती ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने का अनुरोध प्रमुख वन संरक्षक जयराज से किया था। इसी क्रम में वन संरक्षक अनुसंधान संजीव चतुर्वेदी को प्रकरण की जांच सौंपी गई है। संजीव चतुर्वेदी के अनुसार बाघिन की मौत की घटना से जुड़े तमाम अभिलेख हरिद्वार वन प्रभाग से मांगे गए हैं। जल्द ही टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण भी किया जाएगा।
एक माह में तीसरी जांच का जिम्मा
वन मुख्यालय ने एक महीने में तीन अलग-अलग जांचों का जिम्मा वन संरक्षक अनुसंधान संजीव चतुर्वेदी को सौंपा है। पहला मामला राजाजी नेशनल पार्क में वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर है। प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने 26 अप्रैल को यह जांच वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी को सौंपी थी। इसके अलावा दो मई को राजाजी नेशनल पार्क में तेंदुआ व वन्यजीव अंग बरामदगी के मामले की जांच भी संजीव के पास है और अब बाघिन मामले की जांच भी करेंगे। बता दें वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने चर्चित चंपावत वन प्रभाग में हुई गड़बड़ियों की जांच की थी। दो हजार पन्ने की जांच रिपोर्ट में चंपावत वन प्रभाग में हुए भारी पैमाने पर गड़बड़ियों का खुलासा किया था। बहरहाल नवंबर 2017 में सौंपी गई इस जांच पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
वन संरक्षक से मांगे दिशा-निर्देश
प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने दो मई को राजाजी टाइगर रिजर्व में तेंदुए की खाल व वन्य जीव बरामदगी मामले में जांच संजीव चतुर्वेदी को सौंपी थी, लेकिन बाद में मामले की जांच एसआईटी से कराने की बात वन मंत्री ने कही। ऐसे में वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने प्रमुख वन संरक्षक जयराज से इस जांच के सिलसिले में आवश्यक दिशा निर्देश मांगे हैं। वहीं शासन अभी तक एसआईटी जांच के संबंध में भी कोई फैसला नहीं कर सका है।