फर्जी दस्तावेजों पर चार पर्सनल लोन पास कराने वाले वित्तीय संस्थान के तीन सहायकों के खिलाफ अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय संजय सिंह की कोर्ट ने मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए शहर कोतवाली पुलिस को जांच के आदेश दिए हैं।
चेन्नई की पंजीकृत एनबीएफसी फुलर्टल इंडिया क्रेडिट कंपनी की राजपुर रोड शाखा ने बीते वर्ष संस्थान की तीन सहायक कंपनियां मॉय मुद्रा फिनकॉर्प, एंड्रोमीडा एवं कापर्स डॉटा इंफार्मेशन सेंटर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्ट सील एजेंट (डीएसए) श्याम आर्या, सतीश और अधिकारी पद पर तैनात अनुभव कुमार के माध्यम से प्राप्त चार ऋण आवेदनों को स्वीकृत किया था। चारों ही पर्सनल लोन औसतन पांच लाख रुपये के थे।
फुलर्टल को असलियत का पता तब चला, जब धनराशि जारी होने के बाद तीन खातों की किस्तें टूटने लगी। लोन लेने वाले घर के पते पर नहीं मिले और न ही कार्यस्थल पर, जबकि तीनों ने लोन देने से पहले फाइनल जांच रिपोर्ट दी थी। एड्रेस सत्यापित किया था, जो फर्जी निकला। धोखाधड़ी की पुष्टि होने पर फुलर्टल कंपनी ने पुलिस से शिकायत की। कंपनी ने अधिवक्ता गौरव शर्मा के माध्यम से कोर्ट का सहारा लिया। कोर्ट ने मुकदमा दर्ज कर जांच के आदेश दिए हैं।