दहेज हत्या के आरोपी पति को जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रदीप पंत की कोर्ट ने बरी कर दिया। इस मामले में अभियोजन दहेज की मांग को कोर्ट में साबित नहीं कर पाया। लिहाजा, साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने आरोपी के पक्ष में निर्णय सुना दिया।
घटना 31 अक्तूबर 2016 को हुई थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता आशुतोष गुलाटी ने बताया कि महिला के भाई दीपक ने मुकदमा दर्ज कराया था। दीपक का कहना था कि उसकी बहन पूजा की शादी मेहूंवाला निवासी रुपेश के साथ 2013 में हुई थी। अपनी क्षमता के अनुसार उन्होंने शादी में दान दहेज भी दिया था। लेकिन, रुपेश और उसके परिजन लगातार पूजा को दहेज के लिए प्रताड़ित करते आ रहे थे। इस बीच 31 अक्तूबर 2016 को फोन आया कि पूजा की मृत्यु हो गई है। जब वह घर पहुंचे तो देखा कि पूजा बिस्तर पर पड़ी थी। रुपेश और उसकी मां ने बताया था कि पूजा ने फांसी लगाई है।
इस पर दीपक ने हत्या का आरोप लगाते हुए रुपेश और उसके परिजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने नौ जनवरी 2017 में रुपेश के खिलाफ दहेज हत्या और दहेज के लिए प्रताड़ित करने के आरोप में आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। जब मुकदमा चला तो पता चला कि ससुराल वालों ने पूजा की सहूलियत के लिए घर में काफी काम भी कराया था। उन्होंने उसके लिए अलग से एक बाथरूम भी बनवाकर दिया था। ऐसे में अभियोजन इस बात को सिद्ध ही नहीं कर पाया कि कभी ससुराल वालों ने उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया हो। ऐसे में कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर रुपेश को बरी कर दिया।