कालागढ़ वन प्रभाग के पाखरो में टाइगर सफारी निर्माण मामले में विजिलेंस टीम ने पूर्व उप वन संरक्षक किशन चंद्र समेत कई अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। यह कार्रवाई टाइगर सफारी निर्माण में बिना स्वीकृति सरकारी पैसा खर्च करने के आरोप में जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश होने के बाद की गई है।
Dehradun: पूर्व आईएफएस किशनचंद सहित कई अधिकारियों पर मुकदमे की शासन ने दी अनुमति, इस खुलासे ने था चौंकाया
मामला दो साल पहले का है। कॉर्बेट पार्क की पाखरो रेंज की 105 हेक्टेयर जमीन पर टाइगर सफारी का निर्माण होना था। निर्माण के दौरान तत्कालीन कालागढ़ वन प्रभाग के उप वन संरक्षक किशन चंद्र (अब सेवानिवृत्त) समेत कई वन अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदार पर बिना अनुमति सरकारी पैसा खर्च करने का आरोप लगा था। इसे भ्रष्टाचार मानते हुए शासन ने इसकी जांच विजिलेंस टीम को सौंपी थी। विजिलेंस की शुरुआती जांच में कई तरह की प्रशासनिक, विधिक, वित्तीय समेत अन्य तरह की खामियां सामने आई थीं। प्राथमिक जांच में प्रथमदृष्टया आरोप सही पाए गए थे। इसकी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सोमवार को विजिलेंस हल्द्वानी ने तत्कालीन वन अधिकारी किशनचंद्र समेत कई अधिकारियों और कर्मचारियों समेत ठेकेदार और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
एसपी विजिलेंस प्रहलाद सिंह मीणा ने बताया कि मामले में अभी एक ही अधिकारी को नामजद किया गया है। विवेचना सीओ विजिलेंस अनिल मनराल को सौंपी गई है। विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी और प्रकाश में आने वाले नामों को शामिल किया जाएगा।
निलंबित हुए थे दो अधिकारी
दो साल पहले जब मामला संज्ञान में आया तो कोर्ट ने सख्ती दिखाई। इसके बाद आईएफएस सुहाग और किशन चंद को निलंबित कर दिया था। वहीं टाइगर रिजर्व के निदेशक राहुल को वन मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। इसके अलावा आईएफएस राजीव भरतरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।