नवगठित समिति के लिए समन्वय से लेकर सहमति तक की होगी चुनौती
अस्था, विश्वास के साथ ही रोमांच के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हिमालीय महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात को लेकर सभी समितियां एक साथ हों इसके लिए सोमवार को समन्वय समिति बना दी गई है। अब इस नवगठित समन्वय समिति के सामने आयोजन को लेकर समन्वय ही नहीं बल्कि श्रीनंदा देवी राजजात को लेकर सहमति तैयार करने की भी चुनौती होगी। हिमालीय महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात पिछले वर्ष 2014 में हुई तो ऐसे में वर्ष 2026 में राजजात के आयोजन की संभावनाएं थीं लेकिन वसंत पर नौटी में राजकुंवरों ने राजजात के लिए वर्ष 2027 में किए जाने मनौती की जबकि मां नंदा के मंदिर कुरुड़ समिति ने वर्ष 2026 में ही बड़ी जात करने की बात कही। ऐसे में विवाद की स्थिति बन गई। इसे लेकर अब 14 सयानें, 12 थोकी ब्राह्मण और अन्य हक हकूकधारी सामने आ गए हैं। कुलसारी की बैठक में समन्वय समिति बनाकर हिमालीय महाकुंभ के लिए एकजुट होने की बात कही गई। अब समिति के सामने बड़ी जात, राजजात सहित तमाम विवादों पर विराम लगाने की चुनौती होगी।
लोक जात हर वर्ष होती है इस बार इसे मॉडल के रूप में आयोजित किया जाएगा। साथ ही अगले वर्ष होने वाली राजजात के लिए समन्वय समिति बनी है। बधाण क्षेत्र में पड़ाव, मंदिर समितियों से समन्वय स्थापित किया जाएगा। साथ ही राजजात में नए पड़ावों को शामिल करने, सभी पड़ावों पर विकास योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए सरकार से भी समन्वय स्थापित किया जाएगा। - सुशील रावत, नवनियुक्त अध्यक्ष श्रीनंदा राजजात समन्वय समिति
ये भी पढ़ें...Uttarakhand: नए तबादला सीजन में 40 हजार से ज्यादा कर्मचारियों के नहीं होंगे तबादले, गृह मंत्रालय का अनुरोध
- हम किसी भी विवाद में नहीं पड़ना चाहते हैं। सरकार की ओर से गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में सरकार समितियों, हकहकूधारियों की बैठक होनी है। साथ ही हम अभी वर्ष 2026 के जो भी कार्यक्रम जारी हुए हैं उसके हिसाब से तैयारी कर रहे हैं और व्यवस्थाएं बना रहे हैं। मैं कोई भी निर्णय नहीं ले सकता जो सभी का निर्णय होगा उसी के अनुसार आयोजन होंगे। - कर्नल हरेंद्र सिंह, नंदानगर।