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Dehradun News: बच्चों को फिर किताबों से जोड़ रहे डोरेमोन और नोबिता

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Iरंग-बिरंगे एनिमेटेड किरदार और नई कहानियां बच्चों की पहली पसंदI
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एक वक्त ऐसा था जब बच्चे किताबों को पढ़ने के लालायित रहते थे। लेकिन, डिजिटल दौर में किताबों को लेकर बच्चों में रुझान कम हुआ है। इसे देखते हुए किताबों का स्वरूप भी बदल गया। रंग-बिरंगे एनिमेटेड किरदार और नई कहानियां फिर से बच्चों को किताबों से जोड़ रहे हैं। इनमें बार्बी, सिंड्रेला, डोरिमोन और नोबिता की कहानियों की किताब सबसे ज्यादा डिमांड में है।

ऐस्ले हॉल में पुस्तक विक्रेता रंधीर अरोड़ा बताते हैं कि उनकी दुकान को 40 साल हो चुके हैं। बदलते वक्त के साथ बच्चों के लिए नई-नई किताबें आई हैं। जिनमें कॉमिक्स, कहानियां, चुटकलों की किताबें शामिल हैं। तीन से पांच साल के उम्र वाले बच्चों के लिए गतिविधि और बोर्ड किताबें खरीदी जाती हैं। वहीं छह से दस साल के बच्चों के लिए छोटा भीम, बार्बी और कहानियों की किताबें खरीदी जा रही हैं। नेशनल बुक ट्रस्ट, चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट, तुलिका, कथा, प्रथम, एकलव्य किताबें भी बच्चों को पसंद आ रही हैं।
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Iबच्चों को साहित्यिक किताबें ज्यादा पसंदI

शिल्पा अरोड़ा बताती हैं कि बच्चों को उनकी रुचि की किताबें पसंद आती हैं। कुछ बच्चों को धार्मिक तो कुछ को वैज्ञानिक किताबें पसंद हैं। वहीं 12 से 15 साल के बच्चों को साहित्यिक किताबें पसंद आती हैं। इनमें गुसबम्ब, इनेड ब्लाइंटन और अमर चित्र कथा जैसी किताब भी हैं। दोस्ती, देशभक्ति दर्शाती कार्टून कैरेक्टर की कॉमिक्स बच्चे ज्यादा खरीदते हैं। अमर चित्र कथा किताब में लोककथाएं, पौराणिक कथाएं, कहावतें आदि हैं। जो मनोरंजन के साथ जीवन की नैतिकता भी सिखाती हैं। इस किताब को 20 से ज्यादा और विदेशी भाषाओं में भी अनुवाद किया गया है।



राजेश कुमार ने बताया कि बच्चों का बदलते दौर के साथ किताबों की तरफ झुकाव कम हुआ है पर आज भी कई माता-पिता बच्चों को किताबें पढ़ा रहे हैं। बताया, उनकी दुकान में बच्चों के लिए कहानियों की किताबें, रंग-बिरंगी कॉमिक्स हैं। अब कार्टून कैरेक्टर कहानियां भी कॉमिक्स में आ रही हैं।

Iमाता-पिता चाहते बच्चे पढ़ें किताबेंI

ज्योति पंत ने बताया कि उनके बच्चों को कहानियां, कविताएं पढ़ने में रुचि हैं। मोबाइल और टेलीविजन के दौर में बच्चों का किताबों में ध्यान केंद्रित करना बड़ा काम हैं। कोरोना आने के बाद बच्चों का ध्यान किताबों की तरफ कम हुआ है। रेखा रावत ने बताया कि बच्चे अब मोबाइल से ही कार्टून और कहानियां देखते और सुनते हैं। क्योंकि कार्टून देखने से बच्चे के जीवन में बदलाव आता हैं। लेकिन, मोबाइल फोन ज्यादा देखने से इसका बच्चों की आंखों पर भी असर पड़ता हैं।
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Iमुझे साइंटिफिक किताबे पढ़ना पसंद हैं। पढ़ाई के चलते वह कई बार ऐसी कहानियां नहीं पढ़ पाते हैं। लेकिन छुट्टी के वक्त कहानियों की किताबें पढ़ते हैं। इसके अलावा उन्हें एकलव्य, कृष्ण लीला, तुलसीदास की कॉमिक्स पढ़ना पंसद हैं। शौर्य
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Iकार्टून कॉमिक्स मेरी फेवरेट हैं। इनमें बार्बी, सिंड्रेला, डोरिमोन, नोबिता की कॉमिक्स पढ़ना पसंद हैं। इसके अलावा कार्टून देखना भी पसंद है। - वंशिकाI
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