देहरादून। मौसम का मिजाज बिगड़ने से बृहस्पतिवार को राजधानी में दिनभर बादलों का डेरा रहा। बूंदाबांदी के चलते एक ही दिन में अधिकतम तापमान पांच डिग्री लुढ़ककर 14.6 पहुंच गया। जबकि रात का न्यूनतम पारा सात डिग्री रिकॉर्ड किया गया। अधिकतम और न्यूनतम तापमान के कम अंतर ने लोगों को कंपा दिया।
पश्चिमी विक्षोभ के चलते बृहस्पतिवार सुबह धूप नहीं निकली। प्रदेश के मैदानी इलाकों में दून सबसे ठंडा रहा। दिनभर बादलों और सूरज के बीच लुकाछिपी का दौर। इसके बाद हुई बूंदाबांदी ने मौसम का मिजाज बदलकर रख दिया। देर शाम हल्की बारिश ने ठंड में और इजाफा कर दिया। मौसम वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि अगले 24 घंटे में आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। साथ ही सुबह के समय कोहरा देखने को मिल सकता है।
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कई चौराहों पर नहीं जले अलाव
जिलाधिकारी के आदेश के बावजूद कई चौराहों पर अलाव नहीं जले। ऐसे में लोगों की मुसीबतें और बढ़ गई। सबसे अधिक दिक्कत उन लोगों को हुई जो रैन बसेरों और चौराहों पर जलने वाले अलाव पर निर्भर रहते हैं।
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ठंडक बढ़ने के साथ ही बढ़ा बीमारियों का खतरा, विशेषज्ञों ने कहा सावधानी बरतें
दूसरी ओर ठंडक बढ़ने के साथ ही सर्दी, जुकाम, बुखार के साथ ही बीमारियों का भी खतरा बढ़ गया है। जिला अस्पताल कोरोनेशन के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ एनएस विष्ट का कहना है कि बहुत अधिक ठंडक पड़ने पर सर्दी, जुकाम, बुखार के साथ ही सांस के रोगियों की भी मुसीबतें बढ़ जाती हैं और यदि ठंडक के साथ ही कोहरा हो तो सांस के रोगियों की मुसीबत दोगुना हो जाती है। ऐसे में सांस रोगियो को सावधान रहने की जरूरत है। डॉक्टर एनएस बिष्ट का कहना हे कि पूरी तरह गर्म कपड़े पहनने के बाद ही लोग घरों से बाहर निकले। ऐसे युवा जो बिना हेलमेट व सिर ढके सड़कों पर गाड़ियां फर्राटा दौड़ाते हैं उन्हें माइग्रेन हो सकता है लिहाजा युवाओं को सावधान रहने की जरूरत है।
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ठंड बढ़ने के साथ ही चिलब्लेन बीमारी का भी खतरा
वरिष्ठ फिजिशियन डॉक्टर केसी पंत के मुताबिक तापमान में भारी गिरावट और ठंडक बढ़ने के साथ ही चिलब्लेन बीमारी का भी खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को एहतियात बरतने की जरूरत है। ठंडक बढ़ने के साथ ही हाथ, पैर की अंगुलियों में सूजन होने के साथ ही उसमें लालिमा हो जाती है और जबरदस्त खुजली होने के साथ ही दर्द होता है। लिहाजा जरूरत इस बात की है कि हाथ, पैर की अंगुलियों को खुला ना रखें। गर्म मोजे और दस्ताने पहनने के साथ ही हाथ पैरों को गर्म रखें। यदि चिलब्लेन की समस्या है तो घरेलू नुख्से आजमाने के बजाय डॉक्टर को दिखा कर उचित सलाह दें।