बिजली के खंभे, पेयजल लाइन और रस्ते भी टूटे
ग्राम प्रधान ने बताया कि ग्वाड़ तोक धौलागिरी गांव से करीब आठ किमी की दूरी पर है। दोपहर करीब 12 बजे मलबे में दबे राजेंद्र सिंह (35) और उनकी पत्नी सुनीता देवी (31) के शव निकाले गए। दूसरे मकान में रहने वाले राजेंद्र सिंह के चचेरे भाई कमांद सिंह (40), उनकी पत्नी रुकमणी देवी (35), बेटी बीना (17), पुत्र सचिन (15) और मां मगन देवी (60) का काफी प्रयास के बावजूद पता नहीं चल पाया। गांव सड़क से चार किमी की दूरी पर है। ऐसे में गांव तक पहुंचने में दिक्कत आ रही है। बिजली के खंभे, पेयजल लाइन और रस्ते भी टूट गए हैं।
मकानों का नमोनिशां तक नहीं बचा
मलबे की चपेट में आने के बाद दोनों मकानों का नामोनिशां तक नहीं बचा। राजेंद्र सिंह और कमांद सिंह गांव में ही खेती-बाड़ी और मेहनत-मजदूरी करते थे। प्रधान अरविंद सिंह रावत ने बताया कि राजेंद्र सिंह के दो बच्चे हैं। बेटी अंशिका (11) और पुत्र सिद्धार्थ (9) रायपुर में मौसी के साथ रहकर पढ़ाई करते हैं। दोनों घर ग्वाड़ गांव के पांच-छह अन्य परिवारों से सात-आठ सौ मीटर दूरी पर थे। रात को मूसलाधार बारिश होने और बादल फटने के कारण लोगों का घटना का पता नहीं चला। सुबह वहां का मंजर देखा तो सभी की आंखें फटी रह गईं। दो परिवारों की खुशियां को एक ही पल में ग्रहण लग गया।