अस्थमा से पहले साइनोसाइटस का इलाज जरूरी
अस्थमा और साइनस एक दूसरे से लिंक हैं। इसलिए अस्थमा का इलाज करने से पहले यह भी जानना जरूरी है कि बच्चे को साइनोसाइटस तो नहीं। अगर बच्चे को साइनोसाइटस या जीईआरडी या पोस्ट नेजल ड्रिप है तो इन चीजों का पहले इलाज करना होता है। इसके बाद ही अस्थमा का इलाज कारगर होगा।
नेबुलाइजर और भाप लेना दोनों अलग
नेबुलाइजर और भाप लेना दो अलग प्रकियाएं हैं, जो मरीज की परिस्थिति पर निर्भर करती हैं। नेबुलाइजर छाती से जुड़ी समस्या में इस्तेमाल किया जाता हैं। अस्थमा में नेबुलाइजर कारगर साबित होता है। इसके अलावा अपर रेस्पिरेटरी डिजीज से जुड़ी बीमारियों में भाप का प्रयोग किया जाता हैं। जिसमें गले का इंफेक्शन और साइनोसाइटिस जैसी बीमारियां शामिल हैं।)
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बच्चे के वजन के हिसाब से प्रोटीन लेना जरूरी
डॉ. गौरव ने बताया कि एक बच्चे के वजन के हिसाब से प्रोटीन लेना जरूरी होता है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि किस खाद्य पदार्थ में कितना प्रोटीन होता है। अंडे, मछली, मांस, नट्स, सोया, ड्राई फ्रूटस, दूध, मीट, मूंगफली में प्रोटीन होता है।