इन दिनों मौसम के बदलाव से खांसी और जुकाम से सभी परेशान हैं। अधिकतर बच्चे सर्दी-खांसी होने पर निमोनिया से पीड़त हो रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक एंटीबायोटिक लेने के बाद बच्चे ठीक हो जाते हैं, लेकिन इस तरह की खांसी को नजरअंदाज न करें। डॉक्टर का कहना है कि यदि बार-बार खांसी और जुकाम हो रहा है तो आगे चलकर इससे अस्थमा का खतरा हो सकता है।
दून अस्पताल के बाल रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गौरव मुखीजा ने बताया कि बच्चों को किसी भी तरह की खांसी है तो उसे नजरअंदाज न करें। खांसी गंभीर होकर अस्थमा का रूप ले सकती है। तीन से छह साल का बच्चा खांसी के साथ सांय सांय की आवाज करता है। सोते समय गले से सीटी की आवाज और धसके वाली खांसी आती है तो ऐसे बच्चे को चाइल्डहुड अस्थमा होने की संभावना बढ़ जाती है।
तीन साल से कम उम्र के बच्चे को अगर खांसी के साथ सांय सांय की आवाज आती है तो आठ साल की उम्र तक वह सामान्य हो जाता है। उन्हें लान्ग टर्म कंट्रोलर दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती। अगर बच्चा तीन साल से अधिक उम्र का है तो अस्थमा से बचाने के लिए अधिक ध्यान दें और डॉक्टर से सलाह जरूर लें। डॉ. गौरव ने बताया कि यदि किसी बच्चे को अस्थमा की शिकायत है तो उसके परिवार की मेडिकल हिस्ट्री को जानना बहुत जरूरी है। इसलिए धसके पड़ने वाली खांसी को नजरअंदाज न करें।
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बच्चे के वजन के हिसाब से प्रोटीन लेना जरूरी
डॉक्टर डॉ. गौरव ने बताया कि एक बच्चे के वजन के हिसाब से प्रोटीन लेना जरूरी होता है। अंडे, मछली, मांस, नट्स, सोया, ड्राई फ्रूटस, दूध, मीट, मूंगफली में प्रोटीन होता है।
इन बातों का रखें ध्यान
- बच्चों को सर्दी से बचाकर रखें।
- गुनगुना पानी पिलाएं।
-फ्रीज की रखी चीजें न खिलाएं।
- सुबह से समय वॉक पर न ले जाएंI