निजी स्कूलोें को मान्यता और अनापत्ति प्रमाण पत्र देने में जारी पैसे के खेल के मामले का संज्ञान अब मुख्यमंत्री ने भी लिया है। सरकार अब इस मामले में जांच कराने के तरीके पर विचार कर रही है। रुद्रपुर के सामाजिक कार्यकर्ता अनुपम ने सचिवालय में तैनात एक अधिकारी और निजी स्कूल के एक संचालक का ऑडियो मुख्यमंत्री को शिकायत के लिए भेजा था।
यह ऑडियो सोशल मीडिया पर भी तैरता रहा। आडियो में दो पक्षों की बातचीत से साफ जाहिर हो रहा है कि सचिवालय में विद्यालयी शिक्षा विभाग के अधिकारी को मान्यता के लिए 50 हजार रुपये देने की बात की जा रही है। इस ऑडियो में यह भी जाहिर है कि इस लेनदेन में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे का स्टाफ, विद्यालयी शिक्षा निदेशालय का एक कर्मी और सचिवालय में तैनात एक अधिकारी भी शामिल है।
सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी मामले को लेकर सख्त रुख अपनाया। मुख्यमंत्री ने पूछे जाने पर एक कार्यक्रम में स्वीकार किया कि मामला उनके संज्ञान में है और इस मामले में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
उधर, विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे इस मामले को लेकर एसआईटी से जांच कराने की बात कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक सरकार के स्तर पर इस मामले में जांच के तरीके पर विचार किया जा रहा है। विभागीय जांच की बजाय सरकार का जोर थर्ड पार्टी से जांच कराए जाने पर अधिक है।
यह बहुत गंभीर मामला है। पहले भी इस तरह के मामले सामने आए थे और सरकार ने कठोर कार्रवाई की थी। अब भी इस मामले में कार्रवाई होगी।
- मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
मंत्री के निजी सचिव ने कहा, मैं जांच की मांग करूंगा
विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के निजी सचिव सोमपाल का कहना है कि वे इस मामले में सामान्य प्रशासन से जांच की मांग करेंगे। दरअसल सोशल मीडिया में तैर रहे ऑडियो में मान्यता के लिए मंत्री के पीए सोमपाल को भी पैसे देने की बात की जा रही है।
सोमपाल ने कहा कि वे गुजरात में हैं और उन्हें पता लगा है कि मान्यता के पैसों के लेनदेन के मामले में उनके नाम का भी जिक्र हुआ है। सोमपाल ने कहा कि मैं आते ही सामान्य प्रशासन से मामले की जांच की मांग करूंगा। इस मामले में यदि उनके खिलाफ कुछ है तो उसे भी सामने लाया जाना चाहिए।