सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम की सूझबूझ से नियंत्रित हुई भीड़
चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण की आपाधापी में सबसे ज्यादा परेशानी तब बढ़ी जब चिलचिलाती धूप में लाइनों में खड़े लोगों ने चीखना चिल्लाना शुरू कर दिया। स्थिति संभलते नहीं दिखी तो सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान और एसडीएम अजयवीर सिंह पर्यटन विभाग के कार्यालय परिसर में मौजूद जीएमवीएन के होटल राही में निर्माणाधीन कमरों में काम रुकवाया और वहां पर अतिरिक्त काउंटर संचालित करने का निर्णय लिया। एसडीएम ने आपदा प्रकोष्ठ में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को तत्काल बुलाया और छह काउंटरों पर उन्हें पंजीकरण के लिए लगा दिया। भीड़ को कुल चार हिस्सों में बांटा गया और फिर पंजीकरण का कार्य शुरू हो सका। साथ ही धूप से बचने के लिए टैंट और पेयजल की व्यवस्था की भी कराई गई।
मई के स्लॉट बुक, ऑनलाइन पंजीकरण की नहीं मिली व्यवस्था
ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा नहीं मिलने के कारण अधिक परेशानी उठानी पड़ी। पूर्व के वर्षों में ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा दी जाती रही। इससे शिक्षित लोग सुविधा के अनुसार स्वत: पंजीकरण कर लेते थे, या तो पंजीकरण कार्यालय पर पहुंचने पर उनकी पर्यटन विभाग की ओर से लगाए गए कर्मचारी मदद कर मोबाइल पर ही पंजीकरण करा देते थे। इस बार ऑनलाइन पंजीकरण बंद होने के कारण लोगों को विभाग के पोर्टल के जरिए पंजीकरण कराने की अनिवार्यता के पेंच में फंसना पड़ा। वहीं कम स्लॉट मिलने के कारण भी परेशानी हुई। जिला पर्यटन अधिकारी सुरेश यादव ने बताया कि प्रतिदिन 500 स्लॉट मिल रहे हैं, ऐसे में भीड़ का पंजीकरण कर पाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों को इस समस्या से पूर्व में ही अवगत कराया गया था।
दलालों से होती रही कई परिवारों की झड़प
बीते सप्ताह हरिद्वार, ऋषिकेश व अन्य स्थानों पर घूमने आए तमाम परिवार दलालों के चंगुल में फंस गए। पंजीकरण आसानी से नहीं होता देख कई परिवार यात्रा करने से मना कर दिए और उन्होंने साथ में मौजूद दलालों से अपने रुपये लौटाने को कहा। इस बात को लेकर पर्यटन कार्यालय में मौजूद खचाखच भीड़ के बीच उनकी दलालों से झड़प होती रही। कई दलाल मौके पर पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी के चलते खिसक लिए तो कुछ ने अपने खर्चे आदि काटकर पर्यटकों के रुपये लौटाए। गुजरात के जामनगर से आए एक परिवार का कहना था कि उन्होंने गाड़ी बुकिंग के लिए एडवांस में दस हजार रुपये दिए थे। ऋषिकेश स्थित ट्रेवल कारोबारी का एजेंट उन्हें महज पांच हजार रुपये लौटाए। यात्रा को लेकर इस मारामारी को देखकर वह इस बार गंगोत्री ओर यमुनोत्री की यात्रा नहीं करेंगे। इसी तरह उड़ीसा से आए कुछ सदस्यों का कहना था उनके साथ जो दलाल आया वह उन्हें लाइन में खड़ा कर खुद फरार हो गया।
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पर्यटन विभाग को नहीं भीड़ का अनुमान
बीते वर्ष कम लोग आए थे, इसका अनुमान नहीं था कि इतनी ज्यादा भीड़ पहले ही दिन उमड़ पड़ेगी। दूसरी मूल समस्या 20 मई तक के स्लॉट फुल हो चुके हैं। ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी इस बार मोबाइल के जरिए नहीं दी गई है। प्रतिदिन 500 स्लॉट दिए जा रहे हैं। फिलहाल जो लोग परिसर में कतारबद्ध हैं भले ही देर रात तक उनका पंजीकरण करना पड़े सभी को सुविधा दी जा रही है।