बदरीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत ने कहा कि बदरीनाथ धाम में कपाट खुलने के समय रावल नहीं पहुंचते हैं तो पंचायत किसी ब्रह्मचारी डिमरी को मुख्य पुजारी नियुक्त करेगी। पंचायत के सदस्य पंकज डिमरी के मुताबिक सरकार अगर ऑनलाइन पूजा कराने की किसी स्थिति पर विचार कर रही है तो यह पूरी तरह से गलत है।
डिमरी पंचायत की मांग है कि तत्काल रावल को एयर लिफ्ट करा कर यहां लाया जाए। अगर रावल चिकित्सीय परीक्षण और अन्य मानकों के कारण उपस्थित नहीं हो पाते हैं तो डिमरी धार्मिक पंचायत टिहरी महाराजा से आज्ञा लेकर किसी अविवाहित डिमरी से रावल के स्थान पर पूजा कराएगी।
सहायक पुजारी मनोरथ डिमरी ने की थी पूजा
पंकज डिमरी के मुताबिक बदरीनाथ धाम में शंकराचार्य परंपरा के नंबूदरी दंडी स्वामी ही प्रधान अर्चक (पुजारी) हुआ करते थे। शंकराचार्य के साथ केरल से आए नंबूदरी ब्राह्मण ही बाद में डिमरी कहलाए गए। वर्ष 1545 में दंडी स्वामी ब्रह्मानंद का धाम में अचानक ही निधन हुआ था तो सहायक पुजारी मनोरथ डिमरी ने पूजा की थी। इसी तरह 1658 में दंडी स्वामी बालकृष्ण का निधन होने पर सकला डिमरी ने मुख्य अर्चक का दायित्व निभाया था।
पंकज डिमरी के मुताबिक रावल की पंरपरा भी टिहरी नरेश के साथ ही शुरू हुई थी। 1776 मेें स्वामी रामकृष्ण का निधन हुआ था, तब तत्कालीन राजा प्रदीप शाह ने गोपाल डिमरी को रावल बनाया था। गोपाल डिमरी गृहस्थ जीवन में आए तो दक्षिण भारत के नंबूदरी ब्राह्मणों में से रावल बनाने की परंपरा शुरू हुई। डिमरी पंचायत का कहना है सरकार कोई भी फैसला परंपरा और धार्मिक रीति को ध्यान में रखते हुए करे। तीर्थ पुरोहितों के साथ ही हक हकूूकधारियों को भी विश्वास में लिया जाए।
फिर करेंगे रावल को लाने की मांग
देवस्थानम बोर्ड की बैठक में बृहस्पतिवार को तय किया गया कि केंद्र सरकार को एक बार फिर रावल को यहां पहुंचाने के लिए अनुमति देने के लिए लिखा जाएगा। बैठक में देवस्थानम बोर्ड के सीईओ रविनाथ रमन, पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर आदि उपस्थित थे।