बदरीनाथ धाम के कपाट बृहस्पतिवार को बंद होने के बाद शुक्रवार को उद्धव और कुबेर की डोली, आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी और रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी सुबह साढ़े नौ बजे योगध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर पहुंचेंगे। उसके बाद आगे की प्रक्रियाएं शुरू होंगी।
देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि उद्धव और कुबेर शीतकाल में योगध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर में निवास करते हैं, जबकि आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में निवास पर रहती है।
21 नवंबर को शंकराचार्य की गद्दी के साथ रावल, धर्माधिकारी, वेदपाठी और देवस्थानम बोर्ड के कर्मचारी जोशीमठ पहुंचेंगे। इसके बाद छह माह तक योगध्यान बदरी और नृसिंह मंदिर में परंपरागत रूप से शीतकालीन पूजा होती रहेगी। बृहस्पतिवार को कपाट बंद होने के बाद बदरीनाथ धाम से श्रद्धालु और स्थानीय लोग धीरे-धीरे लौटने लग गए हैं।