समय पर पता चलता तो बच सकती थी जान
मधुमक्खियों के हमले से जान गंवाने वाले कार्तिक के जंगल में छूटे होने का समय पर पता चल जाता तो उसकी जान नहीं जाती। घायल मनोज के बेहोश होने के साथ ही परिजनों को भी इसका आभास नहीं था कि कार्तिक जंगल में छूटा हो सकता है। मनोज के अस्पताल में होने से परिजन मान रहे थे कि वह कार्तिक को गांव में ही या फिर किसी के पास सुरक्षित छोड़ गया होगा। देर शाम होश आने पर जब मनोज ने कार्तिक के जंगल में होने की बात बताई तो सभी सन्न रह गए।