क्या होता है मास हिस्टीरिया
हिस्टीरिया आमतौर पर मनोविकार या मनोवैज्ञानिक समस्या है। इसमें कई बार किसी एक व्यक्ति की असामान्य हरकत की साथ के अन्य लोग नकल करते हैं। इसमें व्यक्ति भीतर ही भीतर घुट रहा होता है और अपना दर्द किसी को बता नहीं पाता। पहाड़ में ऐसे मामलों में ज्यादातर देव डांगर और झाड़फूंक का सहारा लिया जाता है। ऐसे मरीज दूसरे को झूमते देखते हैं, तो वे भी उसकी नकल करने लगते हैं। मोटे तौर पर इसे ही मास हिस्टीरिया कहते हैं। ये समस्या ज्यादातर कम पढ़ी लिखी या मन की बात को न कह पाने की वजह से सामने आती है।
लक्षण:
पेट या सिर दर्द, बालों को नोंचना, हाथ पांव पटकना, इधर-उधर भागना, रोना, चिल्लाना, गुस्सा करना, उदास रहना, थोड़ी देर के लिए बेहोश होकर अकड़ जाना, भूख और नींद में कमी आना।
इलाज
- मनोचिकित्सक को दिखाया जाए
- काउंसिलिंग के साथ उस परिवार को जागरूक किया जाए
- मन को केंद्रित कर खुद के जीवन में परिवर्तन लाने और नियंत्रण के उपाय खोजे जाएं
जीआईसी में नवंबर के अंतिम सप्ताह में 39 छात्राओं को मास हिस्टीरिया के दौरे पड़े हैं। स्कूल में छात्राओं को समझाने और इलाज कराने के अलावा अभिभावकों से भी मनोचिकित्सकों से परीक्षण कराने की सलाह दी गई है। अभिभावक पूजा अर्चना कराएं लेकिन चिकित्सकीय परामर्श जरूर लें।
-जितेंद्र सक्सेना, सीईओ, चंपावत।
पाटी ब्लॉक के एक जीआईसी में छात्राओं में हिस्टीरिया की शिकायत मिली। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्कूल में काउंसलिंग की है।
- डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।