बलि प्रथा पर लगाया प्रतिबंध
लाटू देवता मंदिर में पहले बलि प्रथा की परंपरा थी। मगर इस बार वाण के ग्रामीणों और मंदिर समिति ने बैठक कर इस प्रथा को हमेशा के लिए प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया। समिति की अपील का असर दिखा और पहली बार मंदिर में कोई बलि नहीं दी गई। यह निर्णय सामाजिक और धार्मिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल की स्थानीय समुदाय ने सराहना की।
मंदिर से जुड़ीं अनोखी परंपराएं
वाण लाटू मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए रहस्य बना हुआ है क्योंकि मंदिर के अंदर क्या है इसकी जानकारी किसी को नहीं है। गांव के लोग लाटू देवता को अपने इष्ट देवता के रूप में पूजते हैं और उनकी विशेष आस्था है। इस गांव की एक और विशेष परंपरा है कि यहां दुल्हन डोली से विदा नहीं होती है। यह परंपरा मां नंदा को डोली से हिमालय के लिए विदा करने की मान्यता से जुड़ी है। इसलिए यहां की दुल्हनें डोली में नहीं बैठतीं।