ग्लेशियर टूटने के बाद ऋषि गंगा में आई बाढ़ से रैंणी गांव में मलारी हाईवे पर बना मोटर पुल बहने से भारत-चीन (तिब्बत) सीमा का संपर्क कट चुका है। इससे सीमा पर सेना की आवाजाही बंद हो गई है। इसके अलावा रैंणी-जुग्जू गांव और तपोवन- भंग्यूल झूला पुल बह गए हैं। इससे इन गांवों का भी अन्य क्षेत्रों से संपर्क टूट गया है। क्षेत्र के लाता, रैंणी, फाक्ती, सुराईंथोटा आदि गांव पुल टूटने से अलग-थलग पड़ गए हैं। तपोवन में भंग्यूल (गंगा पार) को जोडने वाला झूला पुल भी बह गया है।
1500 करोड़ का हुआ नुकसान
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने सोमवार को प्रभावित क्षेत्र तपोवन का दौरा कर स्थानीय लोगों से आपदा की जानकारी ली। उन्होंने एनटीपीसी के अधिकारियों से परियोजना के बारे में जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि तपोवन और ऋषि गंगा परियोजनाओं को लगभग 1500 करोड़ की क्षति हुई है। वर्ष 2023 तक 520 मेगावाट की तपोवन-विष्णुगाड परियोजना का कार्य पूरा पूर्ण होना था, लेकिन परियोजना बैराज, टनल और आसपास टनों मलबा पसरा है। इसे हटाने में समय लगेगा। इसके बाद परियोजना निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया जाएगा।