इन विषयों का प्रैक्टिकल भाग 35 अंक और थ्योरी 15 अंकों की होगी। सीनियर सेकेंडरी स्तर पर इस प्रकार के 37 विषय और सेकेंडरी स्तर पर 17 विषयों को रखा गया है। अगर कक्षा 10 में कोई बच्चा किसी एक मुख्य विषय में असफल रहता है और इन विषयों में सफल रहता है तो इसके आधार पर उसका एक साल बचाया जा सकेगा।
सीबीएसई का मकसद छात्रों को सामान्य और पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक शिक्षा देने का है। सीबीएसई का यह फैसला सराहनीय है, इससे छात्र-छात्राओं को अपना करियर चुनने में काफी मदद मिलेगी। साथ ही विभिन्न उद्योगों की डिमांड के हिसाब से मैन पावर की जरूरत को भी पूरा किया जा सकेगा।
- प्रवींद्र कुमार रौतेला, प्रधानाचार्य सिंथिया स्कूल
सीबीएसई की ओर से कौशल पाठ्यक्रमों को मुख्यधारा में लाने का फैसला अच्छा है। इससे विद्यार्थी न सिर्फ कौशल सक्षम होंगे बल्कि उनमें सैद्धांतिक ज्ञान, दृष्टिकोण और सॉफ्ट स्किल्स का भी विकास होगा, जो एक व्यापक आधारित शिक्षा के माध्यम से विशेष व्यवसाय के लिए आवश्यक है।
- डॉ. गीतिका बल्यूटिया, चेयरपर्सन इंस्पिरेशन पब्लिक स्कूल
व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को शिक्षा कक्षा छह से मिलने से बच्चों में जल्दी ही कौशल विकास होगा और उन्हें अपना करियर चुनने में मदद मिलेगी। कौशल विकास आधारित शिक्षा से सबसे बड़ा यह लाभ होगा कि छात्र सरकारी नौकरियों की ओर दौड़ लगाने के बजाय स्वरोजगार अपना सकेंगे।
- तिलकराज तलवार, प्रबंधक बियरशिवा स्कूल
सीबीएसई का कक्षा छह से व्यावसायिक पाठ्यक्रमों शुरू किए जाने का फैसला स्वागतयोग्य है। बच्चों को इंटरमीडिएट में आने पर करियर चुनने की चिंता नहीं होगी, वे पहले ही अपना करियर तय कर सकेंगे। बच्चों में स्वरोजगार से जुड़ने की भावना भी पैदा होगी।
- दयासागर बिष्ट, एडवोकेट, चेयरमैन शैमफोर्ड स्कूल