रेलवे के ट्रैक्शन रिचार्ज डिपो (टीआरडी) में हुई सामान की हेराफेरी के मामले में सीबीआई तत्कालीन सीनियर सेक्शन इंजीनियर श्रीराम मीणा के खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि मीना ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलमार्ग पर प्रयोग होने वाले करीब 17 लाख रुपये से ज्यादा के ट्रैक्शन उपकरणों का गबन किया है। इसके लिए मीणा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेज भी बनाए थे। सीबीआई ने इस मामले में करीब 10 महीने तक जांच की है।
गौरतलब है कि पिछले साल हर्रावाला स्थित टीआरडी में गड़बड़ी और सामान की हेराफेरी की शिकायत सीबीआई को की गई थी। इसके बाद सीबीआई ने रेलवे से अनुमति लेने के बाद हर्रावाला स्थित इस डिपो का निरीक्षण किया और प्राथमिक जांच शुरू कर दी। सीबीआई से मिली जानकारी के अनुसार वीरभद्र से नए ऋषिकेश रेलवे स्टेशन तक के 25 केवी ओवरहेड ट्रैक्शन लाइन का काम मैसर्स मनराज इंटरप्राइजेज नई दिल्ली को दिया गया था। इस फर्म ने 20 अक्तूबर 2018 को काम शुरू किया और 30 सितंबर 2020 को खत्म कर दिया। इसके बाद इस ट्रैक्शन लाइन के निर्माण के बाद जो उपकरण बचे उन्हें फर्म ने रेलवे विकास निगम के वीरभद्र स्टेशन के कार्यालय में सौंप दिए।
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वीरभद्र रेलवे स्टेशन हर्रावाला स्थित टीआरडी के अंतर्गत आता है। इसका इंचार्ज उस वक्त सीनियर सेक्शन इंजीनियर श्रीराम मीणा था। जो बचे हुए उपकरण थे उन्हें रेल विकास निगम के सीनियर मैनेजर विनोद शर्मा ने टीआरडी इंचार्ज हर्रावाला को सौंप दिए। इसके लिए उपकरणों की एक लिस्ट पर मीणा ने हस्ताक्षर भी किए। लेकिन, डिपो में जो उपकरण रखे जाने थे उनके स्थान पर दूसरे उपकरणों को रख दिया गया। इसके लिए मीणा ने वहां से ओरिजनल सूची के स्थान पर फर्जीवाड़ा कर बनाई सूची को रख दिया। आरोप है कि मीणा ने करीब 17 लाख रुपये से ज्यादा के ये उपकरण कहीं गायब करा दिए। प्राथमिक जांच के दौरान ही मीणा को दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया गया था। अब जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने मीणा के खिलाफ गबन, जालसाजी और भ्रष्टाचार के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है।